राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मौजूदगी में मेडिकल कॉलेज टांडा और एचपीयू के दीक्षांत समारोहों में यूजीसी के परंपरागत परिधानों में डिग्रिया लेने के निर्देशों को नजरअंदाज किया गया है। दीक्षांत समारोहों में टांडा के डॉक्टरों और एचपीयू के विद्यार्थियों ने इंग्लिश गाउन और हैट में डिग्री हासिल की।
इधर, सोमवार को ही आईआईटी मंडी की कनवोकेशन में देश के विभिन्न कोने के छात्रों ने पारंपरिक हिमाचली टोपी और ऊन से बनी धरीदार पट्टी वाले चोगे (गाउन) में डिग्रियां हासिल की। इस कनवोकेशन ड्रेस की खास बात यह थी कि इसे जहां आईआईटीयन के यंग ब्रेनज ने डिजाइन किया था। वहीं इसमें लगी ऊन और ऊन पर लगी पट्टी को स्थानीय बुनकरों ने तैयार किया था।
पहली बार परंपरागत ड्रेस: निदेशक
आईआईटी के निदेशक प्रो टीमोथी ए गोंजालविस ने कहा कि यूजीसी के नियमों को फॉलो करते हुए आईआईटी मंडी ने खास कनवोकेशन ड्रेस तैयार थी। कनवोकेशन गाउन कमेटी ने छात्रों के इस डिजाइन को अप्रूव किया था। जबकि स्थानीय बुनकरों, टेलर से यह पोशाक तैयार करवाई गई है।
रैंचों और झुलझुनवाला भी परंपरागत ड्रेस में दिखे
आईआईटी मंडी की कनवोकेशन में मुख्य अतिथि पदमश्री प्रो. अशोक झुनझुनवाला और वशिष्ट अतिथि वैज्ञानिक सोनम वांगचुक भी परंपरागत ड्रेस में दिखे। थ्री इडियट मूवी के हिट होने के बाद ही सोनम वांगुचक को रैंचो के किरदार से जोड़कर देखा जाने लगा था। वहीं सोनम खुद भी कहते हैं कि थ्री इडियट मूवी के किरादर रैंचो ने उन्हें दुनिया में प्रसिद्ध किया है।
तीन रंग की पट्टी पोशाक में
कनवोकेशन ड्रेस के बॉर्डर में तीन रंगों संतरी, नीले और हरे ट्राइ कलर की पट्टी लगाई गई। पट्टी का हरा रंग वैजिटेशन और हिमालय का प्रतीक माना जाता है। नीला रंग नदी के पानी और आसमान का एवं संतरी रंग ऊर्जा का रंग माना जाता है। इस पट्टी में तीनों रंगों का मिश्रण किया गया है।