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Shimla News: एचपीयू में धार्मिक टिप्पणियों पर विवाद गहराया, जांच शुरू

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एबीवीपी ने एक कार्यक्रम में धर्म पर टिप्पणियां करने का लगाया था आरोप, लोक प्रशासन विभाग विभाग के छात्र बोले आरोप गलतविवि प्रशासन कर रहा है मामले की जांच : डीएस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के लोक प्रशासन विभाग में ज्योतिबा फुले की जीवनी पर आयोजित सत्र को लेकर विवाद गहरा गया है। वहीं विवि ने भी अपने स्तर पर इस मामले की जांच कर दी है।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने सत्र में हिंदू धर्म से जुड़ी भावनाएं आहत करने और बाहरी व्यक्तियों के बिना अनुमति प्रवेश करने का आरोप लगाया था। इसके बाद शुक्रवार को विभाग के छात्रों ने सामने आकर इन आरोपों को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया। वहीं एबीवीपी ने राम सेतु और भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाने के आरोप लगाए थे। एबीवीपी ने आरोप लगाए कि तीन अज्ञात व्यक्तियों ने कक्षा में प्रवेश कर धार्मिक ग्रंथों और आस्थाओं पर टिप्पणी की जिससे छात्रों की भावनाएं आहत हुईं। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्तियों के पास कोई आधिकारिक अनुमति नहीं थी और विभाग के एक प्राध्यापक ने अपने स्तर पर उन्हें बुलाया। इस मामले में अक्षय ठाकुर ने प्रशासन से कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि कार्रवाई न होने पर आंदोलन किया जाएगा।

लोक प्रशासन विभाग के छात्रों ने शुक्रवार को डीन ऑफ स्टडीज को ज्ञापन सौंपते हुए इस पूरी घटना पर अपनी राय रखी। छात्रों का कहना है कि वह सत्र के दौरान स्वयं उपस्थित थे और कार्यक्रम पूरी तरह अकादमिक दायरे में आयोजित हुआ। इनके अनुसार सत्र बौद्धिक चर्चा और आलोचनात्मक विमर्श पर केंद्रित था जिसमें किसी भी धर्म विशेष को निशाना नहीं बनाया गया।
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छात्रों ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और कुछ मंचों पर सत्र को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई गई है जिससे अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। उन्होंने एबीवीपी पर सत्र का गलत प्रचार करने का आरोप लगाते हुए संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। छात्रों का कहना है कि अकादमिक गतिविधियों में इस तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप अस्वीकार्य है और इससे विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित होती है। एसएफआई परिसर सचिव मुकेश ने बताया कि छात्रों ने प्रशासन को आगाह किया है कि बाहरी दबाव के आधार पर कोई जल्दबाजी में निर्णय न लिया जाए। उनका कहना है कि अकादमिक स्वतंत्रता से समझौता संस्था की विश्वसनीयता और शैक्षणिक माहौल के लिए नुकसानदेह होगा। विश्वविद्यालय के डीएस बीके शिवराम ने कहा कि विवि प्रशासन मामले की जांच कर रहा है।


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