हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के बैनर तले मंगलवार को प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मुलाकात की। प्रदेशाध्यक्ष विरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में मिले संघ ने नियमितीकरण के आडे़ आ रही 31 मार्च की शर्त को हटाने की मांग की।
विरेंद्र चौहान ने मुख्यमंत्री को बताया कि नियमितीकरण में लगी 31 मार्च की शर्त से करीब 2500 अनुबंध अध्यापकों जिनका पांच वर्ष का सेवाकाल पूरा हो गया है, नियमित नहीं हो पा रहे। 31 मार्च की शर्त लगाना और उसके बाद केवल साल में एक बार ही नियमितीकरण करना तर्कसंगत नहीं है। 31 मार्च के स्टेटस के अनुसार नियमितीकरण जुलाई तक चला जाता है।
एक अनुबंध कर्मचारी 5 की जगह 6 से अधिक वर्षों तक अनुबंध पर रखा जा रहा है। जो अध्यापक जिस दिन अपना पांच वर्ष का सेवाकाल पूरा करता है, उसी दिन से नियमित माना जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कंप्यूटर शिक्षकों के संदर्भ में बीते साल हुई सहमति पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है। अध्यक्ष ने बताया कि कंपनी के साथ एक साल की जगह 6 महीने का नया एमओयू हस्ताक्षरित होना था।
शिक्षकों 15 प्रतिशत वेतन वृद्धि होनी थी, लेकिन अभी तक कोई काम नहीं किया। विभाग में खाली विभिन्न पद भरने का भी आग्रह किया। विरेंद्र चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का आश्वासन दिया है। प्रतिनिधिमंडल में संघ से डा. कुलदीप अत्री, चंद्रमोहन शर्मा, सुरेंद्र वशिष्ठ, नरेंद्र सूद, तिलक शर्मा के अलावा प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र वर्मा, उपाध्यक्ष एसबी नेगी, राजेंद्र शर्मा, ओम प्रकाश चौहान, दिवेश कुमार, कोषाध्यक्ष रवि वर्मा, यशवीर रनौत, नरेश कुमार, संदीप कुमार, हरीश वर्मा, धर्मेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा, ज्ञान चंद, जसपाल, प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।
इन मांगों से भी करवाया अवगत
- अनुबंध अध्यापकों की सेवा की अवधि को संपूर्ण सेवाकाल में शामिल किया जाए। नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता लाभ दिया जाए।
- अनुबंध अध्यापकों को संशोधित वेतनमान और ग्रेड पे दी जाए। संशोधित ग्रेड पे में लगी 2 साल की शर्त समाप्त हो।
- वार्षिक वृद्धि को वेतन वृद्धि मानकर मूल वेतन में जोड़ा जाए।
- चिकित्सा अवकाश, विशेष अवकाश को अर्जित अवकाश में बदला जाए।