टोयोटा सिलवरमून मोर्ट्स हटवास नगरोटा बगवां को उपभोक्ता आयोग की खंडपीठ ने शिकायतकर्ता की गाड़ी का इंजन बदलने के आदेश दिए हैं। साथ ही शिकायकर्ता को 40 हजार रुपये मानसिक परेशानी और 10 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च के भी देने को कहा है। इसके अलावा 30 दिन के भीतर गाड़ी को दुरुस्त कर उसे ठीक करने का प्रमाणपत्र भी देना होगा। अगर 30 दिन के भीतर राशि नहीं लौटाई तो कंपनी से हर दिन 500 रुपये का जुर्माना भी वसूल किया जाएगा। यह फैसला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य नारायण ठाकुर व आरती सूद की खंडपीठ ने सुनाया है। जानकारी के अनुसार शिकायकर्ता घनश्याम सिंह पुत्र चमेल सिंह वीपीओ समीरपुर जिला कांगड़ा ने उपभोक्ता आयोग में टोयोटा सिलवरमून मोर्ट्स हटवास नगरोटा बगवां और बंगलूरू स्थित कंपनी के जनरल मैनेजर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। इस दौरान शिकायकर्ता ने कहा था कि उसने टोयोटा कंपनी की गाड़ी 21 अक्तूबर, 2014 को खरीदी थी।
इसके बाद 2017 में गाड़ी का इंजन कुछ दिक्कत देने लगा, जिसके चलते शिकायकर्ता कंपनी के पास पहुंचा और समस्या बताई। इस दौरान कंपनी ने गाड़ी का इंजन बदला व अन्य छोटा-मोटा काम किया। लेकिन गाड़ी की दिक्कत फिर भी दूर नहीं हुई। इसके बाद कंपनी ने गाड़ी का वैक्यूम पंप बदल दिया, लेकिन गाड़ी की समस्या ज्यों की त्यों रही। इसके बाद शिकायकर्ता कई बार कंपनी के पास गया, लेकिन उसकी समस्या हल नहीं हुई। थक हारकर उसने इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग में कर दी। शिकायत को मंजूर करते हुए उपभोक्ता आयोग ने विपक्षी पार्टी को नोटिस जारी किया। इस दौरान कंपनी ने जवाब दिया कि शिकायतकर्ता ने तय समय व मापदंडों के अनुसार गाड़ी की सर्विस नहीं करवाई थी, जिसके चलते उसकी गाड़ी में दिक्कत पेश आई। वहीं, शिकायकर्ता की ओर पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने शिकायत को मंजूर करते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया है।