धर्मशाला के एक व्यक्ति ने दाड़ी स्थित करीब 5 कनाल सरकारी जमीन का मालिकाना हक लेने को राजस्व अधिकारियों के पास प्रार्थना पत्र दिया था। हवाला दिया कि जमीन पर करीब 1943 से उसके पुरखों का कब्जा है। पुरखे सरकार को लगान देते थे, इसलिए उसे जमीन का मालिकाना हक मिलना चाहिए। अधिकारियों ने जब राजस्व रिकॉर्ड चेक किया तो कब्जाधारक की जमीन सरकार के नाम पर पाई गई।
पाया गया कि सरकार को कोई लगान नहीं मिला है। अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए कब्जाधारक को सरकारी जमीन का मालिकाना हक देने से इंकार कर केस को रिजेक्ट कर दिया। इसके बाद जमीन का केस अप्रूव करने को पक्ष और विपक्ष के तीन नेताओं ने अफसरों पर सियासी दबाव बनाया। मामला सत्तापक्ष के उच्च पदों तक पहुंचा। अब सियासी चाल चलकर जमीन शिमला से हड़पने की तैयारी कर ली गई है।
पेट्रोल पंप की चाहत में शुरू हुआ सियासी खेल
सूत्रों के अनुसार कब्जाधारक व्यक्ति सरकारी जमीन पर पेट्रोल पंप बनाना चाहता है। पेट्रोल पंप लगाने वाली कंपनी ने व्यक्ति से जमीन के मालिकाना हक वाले कागजात मांगे हैं। कंपनी में कागजात जमा कराने की अंतिम तारीख 5 जनवरी तक है। इसलिए, शिमला में तीन जनवरी को केस की सुनवाई होने को सियासी दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कब्जाधारक कुछ माह में एक विधायक का समधी भी बनने वाला है।