हिमाचल के दूसरे नगर निगम धर्मशाला के पहले चुनाव में कांग्रेस ने परचम लहराया है। दिग्गज नेताओं के साथ पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भाजपा समर्थक उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
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भाजपा की निवर्तमान नप अध्यक्ष के अलावा पार्टी के मेयर पद के संभावित उम्मीदवार भी चुनाव हार गए हैं। कुल 17 वार्डों में से 13 पर कांग्रेस समर्थक उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। भाजपा नगर निगम चुनाव में मात्र 3 सीटों पर सिमट कर रह गई।
एक सीट निर्दलीय प्रत्याशी की झोली में आई है। भाजपा को पार्टी समर्थित चेहरों के बूते चुनाव में उतरना भी महंगा पड़ा। पहले नगर निगम के चुनाव में धर्मशाला के लोगों ने दिल खोलकर वोट डाले। कुल 74.18 फीसदी मतदान रहा।
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कांग्रेस समर्थक ही बनेगा पहला मेयर
धर्मशाला नगर निगम चुनावों में विजेता रहे देवेंद्र जग्गी समर्थकों के साथ।
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव परिणाम के बाद अब साफ हो गया है कि धर्मशाला नगर निगम का पहला मेयर कांग्रेस समर्थक ही बनेगा। इसके लिए लॉबिंग शुरू हो गई है। शहरी विकास विभाग के निदेशक अब शपथ ग्रहण समारोह के लिए विजेता पार्षदों को आमंत्रित करेंगे। इसके बाद पार्षद अपना मेयर और डिप्टी मेयर चुनेंगे।
पहले ही चुनाव में जनता ने धर्मशाला के कुछ बड़े चेहरों को नकार दिया। भाजपा की निवर्तमान नगर परिषद अध्यक्ष कमला पटियाल चुनाव हार गईं। वहीं, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुरेश पप्पी को भी हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के मेयर पद के संभावित उम्मीदवार जसवीर कौशल भी चुनाव हार गए।
कांग्रेस के पक्ष में गया भारत-पाक मैच मुद्दा
धर्मशाला नगर निगम चुनावों में विजेता रही सरोज गुलेरिया समर्थकों के साथ।
- फोटो : अमर उजाला
जनता ने नए चेहरों को मौका दिया। चुनाव में कुल 113 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। खुले रूप से पार्टी समर्थित चेहरे न उतारने का कांग्रेस का दांव सही बैठा। चुनाव की खुद कमान संभालने वाले शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा के फैसले ने कांग्रेस को जीत दिलाई।
जबकि, भाजपा के दिग्गज नेताओं पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल, सांसद शांता कुमार, हिमाचल प्रभारी श्रीकांत शर्मा, प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती सहित संगठन के बड़े नामों की रणनीति चुनाव में धराशायी हो गई। चुनाव परिणाम के बाद शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा का कद और बढ़ गया है जबकि पूर्व मंत्री किशन कपूर को सियासी रूप से बड़ा धक्का लगा है।
धर्मशाला में भारत-पाक मैच रद्द होने का मुद्दा भले ही भाजपा ने बनाया, लेकिन इसका फायदा कांग्रेस के पक्ष में ही गया। भाजपा को इससे नुकसान ही हुआ। प्रचार के दौरान अनुराग ठाकुर के वायस कॉल मैसेज जनता तक पहुंचाए गए, लेकिन वोटरों को नहीं लुभा सके। पहले माना जा रहा था कि मैच का मुद्दा भाजपा को जीत दिलाएगा लेकिन पार्टी का दांव उल्टा पड़ गया।