राज्य सरकार के तीन कैबिनेट मंत्रियों आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स, खाद्य, परिवहन मंत्री जीएस बाली और ग्रामीण विकास मंत्री अनिल शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ दिए गए बयान की निंदा की है।
मंत्रियों ने धूमल को परामर्श दिया कि वह कांग्रेस सरकार को धमकियां देना बंद करते हुए परिपक्वता वाला व्यवहार करें। उन्होंने धूमल से जानना चाहा कि वे किस क्षमता में राज्य में मध्यावधि चुनाव का सुझाव दे रहे हैं। उन्हें कांग्रेस के बारे में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस ने पहले भी ऐसी स्थितियाें का सामना किया है और हर बार पार्टी अधिक मजबूती के साथ उभरी है।
कांग्रेस ने संसदीय चुनावों को एक संगठन के रूप में लड़ा, जबकि भाजपा का सारा चुनाव प्रचार नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द रहा और पार्टी को पीछे धकेल दिया। यह हास्यास्पद है कि राज्य में कांग्रेस की हार के लिए किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया जाए।
उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर जनादेश नहीं हैं। हाल ही के चुनावों में देश भर में मोदी लहर थी, जिसका प्रभाव हिमाचल पर भी पड़ा। इसका श्रेय भाजपा या धूमल को नहीं जाता। वह स्वयं हमीरपुर तक सीमित रहे, जहां से उनके पुत्र चुनाव लड़ रहे थे।
स्टोक्स, बाली और अनिल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस तथा सरकार ने लोगों के जनादेश को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास जताया है।
धूमल बदले की भावना से वीरभद्र सिंह को निशाना बना रहे हैं, क्योंकि वे गत विधानसभा चुनावों में मिली हार को पचा नहीं पा रहे हैं। धूमल प्रदेश में निर्वाचित लोकप्रिय सरकार को अस्थिर कर किसी भी तरह सत्ता हासिल करने की मंशा को पाले हुए हैं, परंतु उनका ये सपना कभी पूरा नहीं होगा।
मंत्रियों ने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस सरकार सुदृढ़ है और अपना कार्यकाल पूरा करेगी। सभी 36 विधायक और 4 निर्दलीय विधायक वीरभद्र सिंह के साथ हैं। पार्टी में कोई भी मतभेद नहीं है।