बजट सत्र के पहले दिन हुए हंगामे के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जीएस बाली ने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को पहले आपस में बैठकर पूरे मामले को सुलझाना चाहिए। एक प्रतिनिधिमंडल राजभवन जाए और राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले पर खेद जताए। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अगिभनहोत्री सहित अन्य विपक्षी विधायकों के खिलाफ एफआईआर में जो धाराएं लगाई गई हैं, वे सही नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रद्रोह का केस बिल्कुल भी नहीं बनता है।
पूर्व मंत्री जीएस बाली रविवार को कांग्रेस पार्टी प्रदेश मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हंगामे के क्या कारण रहे और कौन-कौन इसमें शामिल थे, वे इस पर चर्चा नहीं करना चाहते। हिमाचल को देवभूमि और शांतिप्रिय प्रदेश के रूप में जाना जाता है। राज्यपाल एक संवैधानिक पद है और सभी का दायित्व है कि उनके सम्मान में कोई कमी न हो और न ही किसी तरह से ठेस पहुंचे।
बाली ने कहा कि राज्यपाल को हिमाचल विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर और फिर निवास तक सुरक्षित पहुंचाने का काम सरकार का है। यहां कहीं ना कहीं कानून व्यवस्था और खुफिया नाकामी रही है। जो भी हुआ उसके लिए वे खेद प्रकट करते है और सत्तापक्ष को भी चाहिए कि वे भी खेद प्रकट करें।
नेता प्रतिपक्ष के बदले अब हिमाचल प्रदेश विधानसभा के सदन में बजट सत्र के दूसरे दिन वरिष्ठ विधायक आशा कुमारी और विधायक और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह मोरचा संभालेंगे। पूरे बजट सत्र तक नेता प्रतिपक्ष सहित पांच कांग्रेस विधायकों को निलंबित हैं।
कांग्रेस विधायक दल की भावी रणनीति के तहत कांग्रेस के पांचों ंनिलंबित विधायक विधानसभा के बाहर और अन्य कांग्रेस सदस्य सदन के हंगामा भीतर करेंगे। ये सदस्य सदन के भीतर अपने तीखे तेवरों के साथ रहेंगे ताकि सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरकर रखा जा सके। सरकार पर ज्वलंत मुद्दों खासकर महंगाई, भ्रष्टाचार और अवैध खनन को लेकर सरकार को निशाने पर रखा जाएगा।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस विधायक दल रणनीति के तहत सदन में शोक प्रस्ताव के बाद उपाध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्र्ज कराने के लिए दबाव डालेगा। इसके अतिरिक्त निलंबित विधायक सदन के बाहर बैठक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलकर रखेंगे। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि आशा और सुखविंद्र मोर्चा संभालेंगे।