हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने चरस रखने के आरोपी को सशर्त जमानत दी है। अदालत ने अश्वनी भारद्वाज को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों से छेड़छाड़ नहीं करेगा और पुलिस जांच में शामिल होगा। बिना अदालत की अनुमति से वह भारत से बाहर नहीं जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता अदालत की ओर से लगाई गई शर्तों का उल्लंघन करता है तो पुलिस जमानत रद्द करने के लिए आवेदन कर सकती है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ थाना बालूगंज में मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। 19 नवंबर 2022 को पुलिस ने शोघी में नाका लगाया था।
सोलन से आ रही बस से पुलिस ने आरोपी सुमन कुमार से 127.56 ग्राम चिट्टा बरामद किया। पूछताछ करने पर सुमन ने अश्वनी भारद्वाज और नोगली में ढाबा चलाने वाली सुशीला का नाम बताया। पुलिस को बताया गया कि तीनों मिलकर चिट्टा की तस्करी करते हैं। 6 जनवरी 2023 को पुलिस ने अश्वनी भारद्वाज और सुशीला को गिरफ्तार किया। आरोपी ने दलील दी कि उसे चरस रखने के मामले में झूठा फंसाया गया है। अदालत ने पाया कि आरोपी को मुख्य आरोपी के बयान पर गिरफ्तार किया गया। मामले पर विचारण करने से पहले ही आरोपी को सजा देना गैरकानूनी है। मामले पर विचारण करने के लिए अदालत को समय लगेगा। उस समय तक आरोपी को जेल में बंद नहीं रख सकते हैं। अदालत ने उसे सशर्त जमानत देते हुए यह निर्णय सुनाया।