प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भर्ती और नियमितीकरण में गड़बड़ी की शिकायत करना एक शिकायतकर्ता को महंगा पड़ गया। शिकायतकर्ता ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर हिमाचल प्रदेश पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नियमितीकरण में गड़बड़ी की यह शिकायत की थी। पीएमओ ऑफिस के अधिकारियों ने शिकायतकर्ता को ही बुला लिया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि हिमाचल प्रदेश पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में लंबे अरसे से अनियमितताएं चली हुई हैं। पहले भी पीएमओ को शिकायत की जा चुकी है। अब यह शिकायत दोबारा की जा रही है। इस विभाग में 2011 में कुछ अधिकारियों की अस्थायी पदों पर नियुक्ति की गई थी, लेकिन विभाग ने प्रोजेक्ट की अवधि खत्म होने के बावजूद इन अधिकारियों को नहीं उठाया है।
विभाग में रिक्त पद नहीं भरे गए हैं, बल्कि सभी नियमों को नजरअंदाज कर तीन अधिकारियों की सेवाओं को गजटेड पद पर नियमित भी कर दिया गया है। यह मामला उजागर भी किया गया था। बावजूद इसके विभाग ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। पहले इन अधिकारियों के नियमितीकरण के आदेश 28 सितंबर 2017 को किए गए। शिकायतकर्ता ने इसकी प्रति भी संलग्न की।
दो महीने बाद 21 दिसंबर 2017 को अस्थायी रूप से नियमित करने करने की अधिसूचना जारी की गई। इसके अलावा इस विभाग के तत्कालीन अधिकारियों की कार्यशैली पर भी कई तरह के आरोप लगाए गए हैं। अपेक्षित कार्रवाई करने की मांग की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस शिकायत के बाद 23 जुलाई 2019 को अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को पत्र संख्या पीएमओपीजी/डी/2019/0256528 भेजा।
इस बारे में अतिरिक्त सचिव को जांच के लिए लिखा गया। जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी को देने के बजाय निदेशालय को ही दे दी गई। अब इस पर कार्रवाई करने के बजाय निदेशालय की की ओर से उल्टा शिकायतकर्ता को ही बुला लिया गया है। शिकायतकर्ता ने इससे असमर्थता जताते हुए इसे बारे में फिर पीएमओ को शिकायत करने का बीड़ा उठाया है।
शिकायतकर्ता नहीं आना चाहे तो न आए : राणा
हिमाचल प्रदेश पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के निदेशक डीसी राणा ने कहा है कि पीएमओ से जांच के आदेश के बाद इस बारे में छानबीन की जा रही है। इस बारे में अतिरिक्त निदेशक को जांच दी गई है। शिकायतकर्ता को इसलिए बुलाया गया है कि वह अपना पक्ष ठीक से रखें। अगर वह नहीं आना चाहते हैं तो न आए। मामले की जांच इसके बावजूद हो रही है। जहां तक नियमितीकरण की बात है तो ऐसा राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के बाद किया गया है।