गुमनामी के अंधेरे में खो चुके कॉमबरमेयर ब्रिज का ऐतिहासिक गौरव फिर लौटेगा। धरोहरों को सहेजने की ‘अमर उजाला’ की पहल रंग लाई है। गुमनामी के अंधेरे में खो चुके कॉमबरमेयर ब्रिज की खबर पहली किस्त के रूप में 7 नवंबर को प्रकाशित की गई थी।
खबर पर संज्ञान लेते हुए कॉमबरमेयर ब्रिज के जीर्णोद्धार का फैसला लिया गया है। ‘ब्यूटीफिकेशन ऑफ मालरोड’ प्रोजेक्ट के तहत एडीबी (एशियन डेवलेपमेंट बैंक) की मदद से कॉमबरमेयर ब्रिज का कायाकल्प किया जाएगा। 1928 में ब्रिटिश आर्मी अफसर लार्ड कॉमबरमेयर ने पुल का निर्माण करवाया था।
1971-72 में पुल का पुनर्निर्माण किया गया। मौजूदा समय में कॉमबरमेयर पुल गुमनामी के अंधेरे में खो गया है। अब तो किसी को यह पता भी नहीं कि इंदिरा गांधी खेल परिसर और एचपीटीडीसी की लिफ्ट के बीच कोई पुल भी है। एक ऐसा पुल जो अंग्रेजों के जमाने का इतिहास समेटे है।
कामबरमेयर ब्रिज
निर्माण=======1928
पुन: निर्माण====1971-72
निर्माता=======लार्ड कामबरमेयर (ब्रिटिश आर्मी अफसर)
विशेषता=======पुल के नीचे बने टैंक में स्टोर किया जाता था पानी
एडीबी की मदद से संवारा जाएगा ब्रिज
एडीबी की मदद से चल रहे प्रोजेक्ट के तहत मालरोड पर बने ऐतिहासिक कॉमबरमेयर ब्रिज का जीर्णोद्धार किया जाएगा। कॉमबरमेयर ब्रिज के सौंदर्यीकरण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
- देवेंद्र सिंह मधैईक, अधिशासी अभियंता, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट
सैलानी जान सकेंगे कॉमबरमेयर ब्रिज का इतिहास
गुमनामी के अंधेरे में खो चुके कॉमबरमेयर ब्रिज के इतिहास से स्थानीय लोगों और सैलानियों को रूबरू करवाने के लिए खास व्यवस्था की जाएगी। कॉमबरमेयर ब्रिज के पास पट्टिका लगाकर उस पर ब्रिज का इतिहास उकेरा जाएगा।
रोशनी से जगमगाएगा कॉमबरमेयर ब्रिज
कॉमबरमेयर ब्रिज को शहर में एक नए टूरिस्ट प्वाइंट के रूप में विकसित किया जाएगा। ब्रिज को आकर्षक बनाने के लिए पुल के इर्द-गिर्द आधुनिक लाइटें लगाई जाएंगी।