राजधानी शिमला में सरकारी, अर्ध सरकारी और निजी भवनों की छतों को लाल या हरे रंग से रंगने का अंतिम अल्टीमेटम 16 दिसंबर को जारी होगा। नोटिस मिलने के 15 दिन के भीतर भवन मालिकों, किराएदारों और कब्जाधारियों को छतों पर रंग करना होगा।
नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता इन दिनों शहर में उन भवनों की सूची बनाने में जुटे हैं जिनकी छतें बेरंग हैं। 15 दिसंबर को ऐसे सरकारी और निजी भवनों की रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी जाएगी। इसके अगले दिन से नोटिस देने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
तय सीमा पर अगर कोई छतों को नहीं रंगता है तो ऐसे व्यक्तियों के नाम की सूची नगर निगम हाईकोर्ट को सौंपेगा। नियमों की अवहेलना करने वालों की छतों को नगर निगम स्वयं रंग करेगा। रंग का खर्चा भवन मालिकों से वसूला जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेशानुसार नगर निगम ने यह फरमान जारी किया है। नगर निगम के सभी कनिष्ठ अभियंता वार्डों से बिना रंग की छतों का डाटा जुटाने में लगे हैं। छतों को रंगने के लिए नगर निगम भवन मालिकों को नोटिस जारी करने की शक्तियां भी कनिष्ठ अभियंताओं को दी हैं।
हर कनिष्ठ अभियंता को दो-दो वार्डों की जिम्मेवारी सौंपी है। शहर के भवनों में एकरूपता लाने और सुंदरता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है। बिल्डिंग बॉयलाज 1998 के 41.7 के तहत छतों को रंगने का उल्लेख है। ऐसे में छतों में रंग नहीं करवाएगा, उसके खिलाफ एक्ट के तहत कार्रवाई होगी।
कोर्ट की अवमानना का चलेगा केस
छतों को नहीं रंगने वालों पर हाईकोर्ट की अवमानना का केस भी चलाया जाएगा। इस कार्रवाई के तहत भवन मालिकों को सिर्फ जुर्माना लगाकर नहीं छोड़ा जाएगा। निगम आयुक्त पंकज राय ने कहा कि 15 दिसंबर तक सारा डाटा उनके पास आ जाएगा। इसके बाद नोटिस जारी का काम शुरू हो जाएगा।