भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2019 में तंबाकू मुक्त करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनका उद्देश्य सभी शैक्षणिक परिसरों को तंबाकू मुक्त बनाना, सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम 2003 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना है। हिमाचल प्रदेश ने इन दिशा-निर्देशों को 20 जुलाई 2020 को अधिसूचित कर लागू कर दिया था, लेकिन अब सरकार ने इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए सभी कॉलेजों से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
नौ मानक बिंदुओं पर होगी सख्त निगरानी
राज्य के सभी कॉलेजों को 9 बिंदुओं पर कार्रवाई करनी होगी ताकि उन्हें तंबाकू मुक्त संस्थान का दर्जा दिया जा सके। कॉलेज के भीतर सभी प्रमुख स्थानों पर तंबाकू मुक्त बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। बोर्ड पर कॉलेज का नाम और निरीक्षक का संपर्क विवरण अंकित होना चाहिए। कॉलेज के मुख्य द्वार या बाहरी दीवार पर एक बड़ा बोर्ड लगाया जाएगा, जिस पर लिखा होगा तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान। कॉलेज में कहीं भी सिगरेट-बीड़ी के टुकड़े, गुटखा पाउच या थूक के निशान नहीं होने चाहिए। इसको लेकर संस्थान को जीरो टॉलरेंस नीति अपनानी होगी। कॉलेज के गलियारों, कक्षाओं और पुस्तकालयों में तंबाकू के दुष्प्रभावों पर आधारित पोस्टर, चार्ट प्रदर्शित होंगे।
हर तिमाही में कम से कम एक एंटी-तंबाकू कार्यक्रम जैसे शपथ ग्रहण समारोह, पोस्टर प्रतियोगिता, रैली या नुक्कड़ नाटक आयोजित होंगे। सभी छात्र भारत सरकार के पोर्टल पर ऑनलाइन एंटी-टबेको और नशा मुक्त भारत अभियान की शपथ लेंगे। प्रत्येक कॉलेज में शिक्षकों या कर्मचारियों में से कुछ को तंबाकू निरीक्षक नियुक्त किया जाएगा जो जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन और अनुपालन की रिपोर्टिंग करेंगे। कॉलेज की आचार संहिता में नो टबेको यूज पालिसी को शामिल किया जाएगा। कॉलेज के चारों ओर 100 गज की परिधि में लाल या पीली रेखा खींची जाएगी, जहां तंबाकू मुक्त क्षेत्र के बोर्ड लगाए जाएंगे। कॉलेज से 100 गज की दूरी तक कोई दुकान तंबाकू उत्पाद न बेचे, इसके लिए कॉलेज प्रशासन स्थानीय स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और नगर निकाय से समन्वय करेगा।