राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ की राज्य इकाई ने अपनी मांगें मनवाने के लिए आवाज बुलंद कर दी है। शनिवार को संजौली कॉलेज में हुई संघ की बैठक में शिक्षकों ने लंबित मांगों और यूजी में रूसा सीबीसीएस लागू किए जाने से पेश आ रही समस्याओं को दूर करने के लिए आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया। फैसला लिया गया कि संघ 17 मार्च को प्रदेश भर के कॉलेजों में पूर्ण शिक्षा बंद रखेगा।
इसके बावजूद मांगें न मानी गईं तो 7 अप्रैल को शिक्षक राजभवन मार्च करेंगे। संघ के अध्यक्ष राजेश यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पूरे प्रदेश भर की इकाइयों से आए अध्यक्ष, सचिव व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्यों ने मांगों पर विस्तार से चर्चा की। संघ का आरोप है कि शिक्षा विभाग कॉलेज शिक्षकों की पदोन्नति (डीपीसी) और वेतन बढ़ोतरी को लटकाता आ रहा है।
कॉलेजों में रूसा सीबीसीएस को बिना तैयारी और पर्याप्त स्टाफ शिक्षकों के लागू कर शिक्षकों पर अतिरिक्त काम का बोझ डाला गया है। संघ के उपाध्यक्ष सुरेंद्र, महासचिव राम लाल शर्मा अकादमिक सचिव डॉ. जोगेंद्र सकलानी ने कहा कि इस कारण कॉलेज शिक्षकों को 26-30 घंटे पढ़ाना पड़ रहा है। नए सिस्टम की तमाम खामियों के कारण कॉलेज शिक्षकों के साथ आम छात्र भी परेशान हैं। आंदोलन के अगले चरण में शिक्षकों ने मूल्यांकन कार्य को बंद तक करने की चेतावनी दी।
यह भी चर्चा की गई कि शिक्षकों से काम लेते हुए किसी तरह से यूजीसी के मानकों का पालन नहीं हो रहा है। शिक्षकों की पदोन्नति, और वित्तीय लाभ रोके गए हैं। सकलानी ने कहा कि रूसा को सही ढंग से लागू करने में शिक्षा विभाग और एचपीयू में तालमेल की भारी कमी रही है, जो आज तक सही नहीं हो पाया है। इससे छात्रों के प्रवेश से लेकर परीक्षा और परिणाम तक समय से नहीं हो पा रहे हैं।
डिग्री मान्यता मामले को तुरंत सुलझाएं
कॉलेज शिक्षकों ने मांग की है कि यूजी में लागू सीबीसीएस रूसा के तहत पहले बैच के जून में पासआउट होने वाले छात्रों की अन्य विश्वविद्यालय में डिग्री को मान्य करवाने का कार्य पूरा करें, चूंकि यह मामला छात्रों के भविष्य के साथ जुड़ा है।