केंद्र में हर वर्ष नीट, जेईई, नेट, सेट और एचएसएस के लिए हर साल कोचिंग दी जाती है। कोचिंग के लिए ट्राइबल विभाग से नौ लाख की ग्रांट आ गई है। लेकिन, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक सशक्तीकरण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति और ओबीसी छात्रों की कोचिंग के लिए बजट जारी नहीं हुआ है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में चल रहे पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र में इस बार प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कोचिंग कक्षाओं का बैच शायद ही बैठ सके। कोचिंग कक्षाएं चलाने के लिए अब तक ग्रांट ही नहीं मिली है। इस कारण केंद्र प्रशिक्षण के लिए आवेदन तक नहीं मांग नहीं सका है। केंद्र में हर वर्ष नीट, जेईई, नेट, सेट और एचएसएस के लिए हर साल कोचिंग दी जाती है। कोचिंग के लिए ट्राइबल विभाग से नौ लाख की ग्रांट आ गई है। लेकिन, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक सशक्तीकरण विभाग की ओर से अनुसूचित जाति और ओबीसी छात्रों की कोचिंग के लिए बजट जारी नहीं हुआ है।
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इस विभाग से मार्च 2018 में पैसा मिला था, जो खर्च हो चुका है। वर्ष 2021 में पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र ने जो ऑनलाइन कोचिंग कक्षाएं चलाई थी, उसमें शामिल आरक्षित वर्ग के छात्रों का स्टाइपंड और फैकल्टी के मानदेय का लाखों का भुगतान करना बाकी है। विभाग से ग्रांट न आने के कारण इस बार शायद ही केंद्र अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी के छात्रों को कोचिंग की सुविधा नसीब हो। पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. ओपी वर्मा ने बताया कि विभाग से कई बार ग्रांट जारी करनी की मांग उठाई गई है।
आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को मुफ्त मिलती है कोचिंग
विश्वविद्यालय के पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र में एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षित श्रेणी के छात्रों को स्टाइपंड देकर निशुल्क और सामान्य वर्ग के छात्रों को 2500 फीस अदा करने पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग दी जाती है। कोचिंग के लिए ग्रांट मिलती है।
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एससी, ओबीसी, अल्पसंख्यक और विशेष रूप से सक्षम सशक्तीकरण विभाग के निदेशक विवेक भाटिया का कहना है कि एचपीयू के इस सेंटर के लिए तय बजट आता है। इसको लेकर केंद्र के निदेशक को प्रशिक्षण को और बेहतर बनाने के लिए कुछ दिशा-निर्देश दिए हैं। केंद्र का जो पैसा बनता है, उसे जारी कर दिया जाएगा।