सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि मोदी को विपक्ष के नेताओं का आदर करना चाहिए। हर हथकंडे अपनाकर विपक्षी पार्टी की सरकारों को अस्थिर करना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि तालियां दोनों हाथों से बजती हैं, एक हाथ से नहीं। महाभारत, रामायण या इतिहास पढ़ें तो बड़े-बड़े घमंडी लोगों का भी घमंड चूर-चूर हुआ है।
आज प्रजातंत्र में यह कहना कि हम कुछ भी कर सकते हैं यह गलत है। प्रजातंत्र के कुछ उसूल होते हैं। विपक्ष की भी यहां भूमिका होती है। वीरभद्र ने कहा कि उन्हें मुकदमों की आदत पड़ गई है। पहले भी वे दो सेशन ट्रायल से बरी हो चुके हैं। वीरभद्र बोले कि जैसी सरकार पिछले टेन्योर में हिमाचल में रही, वैसी कभी हिंदुस्तान में देखने को नहीं मिली।
वीरभद्र ने फिर की शांता की तारीफ
वीरभद्र बोले कि शांताकुमार दो बार सीएम रहे। उन्होंने शालीनता से सरकार चलाई। किसी को तंग नहीं किया। प्र्रेेमकुमार धूमल ने तो प्रजातंत्र की परिभाषा ही बदल दी। उनके राज में उन्होंने दो दफा मुकदमे भुगते। ये षड्यंत्रकारी लोग हैं। कुछ अधिकारी भी इनके साथ मिल गए थे।
बाली, आशा, अग्निहोत्री ने कर दी मेरी बोलती बंद
वीरभद्र सिंह ने बीच में चुटकी ली कि-मैंने जो बोलना था, उसे मंच पर पहले ही बहुत से नेता बोल चुके हैं। जीएस बाली, मुकेश अग्निहोत्री और आशा कुमारी ने बहुत अच्छा बोला है। इन्होंने तो मेरी बोलती ही बंद कर दी है।