मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स बिल पर फैसला लेना राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेवारी थी, ऐसा न करके उन्होंने संविधान की अवहेलना की है।
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हिमाचल सरकार के लंबित खेल विधेयक पर कोई निर्णय न लेने पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने एक बार फिर राजभवन पर निशाना साधा है। मुख्यमंत्री ने वीरवार को कहा कि स्पोर्ट्स बिल पर फैसला लेना राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेवारी थी, ऐसा न करके उन्होंने संविधान की अवहेलना की है।
राज्यपाल या तो इस बिल पर हस्ताक्षर करते या इसे वापस विधानसभा को भेजते। उन्होंने इन दोनों मामलों में से कुछ नहीं किया। राजधानी शिमला के अंबेडकर चौक पर पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने ये बात उस समय कही, जब उनसे सवाल किया गया कि खेल विधेयक पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अभी तक फैसला नहीं लिया है, आप किस तरह से देखते हैं।
बताते चलें कि स्पोर्ट्स बिल को विधानसभा में पारित हुए एक साल से अधिक का समय हो गया है। राज्य सरकार इसके दायरे में भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाली हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को भी लाना चाहती है, जबकि भाजपा इसका लगातार विरोध करती आई है।
शुरू में ये बिल हिमाचल प्रदेश के पूर्व कार्यकारी राज्यपाल कल्याण सिंह के पास अटका रहा। उन्होंने ये बिल जयपुर भी मंगवा लिया था। बाद में नए राज्यपाल आचार्य देवव्रत की नियुक्ति के बाद उन्होंने इसे वापस राजभवन शिमला केे लिए भेज दिया था। आचार्य देवव्रत ने इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।
जनता चाहेगी तो सातवीं पारी भी खेलूंगा
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
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आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स की ओर से सातवीं बार सीएम बनने के बयान पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि अगर जनता चाहेगी तो मैं सातवीं पारी भी जरूर खेलूंगा।
एचपीसीए पर कसेगी नकेल
हिमाचल सरकार की ओर से लाए गए संशोधित खेल विधेयक में हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन समेत तमाम खेल संघों पर शिकंजा कसने के कई प्रावधान किए गए हैं।
इसे भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर की अगुवाई वाली प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन पर नकेल कसने के रूप में देखा जा रहा है। यही कारण है कि भाजपा इसका विरोध कर रही है। ऐसे में कांग्रेसी यह आरोप लगा रहे हैं कि राज्यपाल भाजपा के दबाव में इस बिल पर मौन हैं।
वर्दी बदलने पर सुक्खू ने राज्यपाल पर साधा निशाना
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू
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काले ड्रेस कोड को लेकर टांडा मेडिकल कॉलेज के स्थगित किए गए दीक्षांत समारोह पर कांग्रेस ने राज्यपाल पर बिना नाम लिए निशाना साधा है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भारत की संस्कृति और सोच महान है।
ऐसे में टांडा मेडिकल कॉलेज के दीक्षांत समारोह के लिए वर्दी का रंग बदलने से क्या होगा। सुक्खू ने कहा कि वर्दी का रंग बदलने से व्यक्ति की सोच और मानसिकता नहीं बदली जा सकती है। शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई कर रहे युवाओं का भारतीय संस्कृति और सभ्यता में विश्वास है।
टांडा मेडिकल कॉलेज के करीब 600 डॉक्टरों को जब सम्मान देने की बात आई तो ऐसी छोटी मोटी बातों का समाधान पहले ही कर देना चाहिए था। वर्दी के रंग के चलते अब डॉक्टरों को अपनी डिग्रियां लेने के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह में वर्दी बदलने का कोई औचित्य नहीं है। भारतीय संस्कृति की सोच वर्दी का रंग बदलने से नहीं बदली जा सकती है। भारत की महान संस्कृति राष्ट्रवाद और राष्ट्रभक्ति से प्रेरित है।