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'रोज डंडे चलाने की प्रैक्टिस करते हैं BJP/RSS वाले'

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हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 29 जनवरी को भाजपा कार्यालय के बाहर हुई खूनी झड़प को दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया है। उन्होंने इस मामले में युवा कांग्रेस को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है।
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वीरभद्र सिंह ने कहा कि युवा कांग्रेस की ओर से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन करने के लिए नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल को फोन करके खुद युकां अध्यक्ष विक्रमादित्य ने सूचना दी थी, लेकिन इस सूचना के आधार पर भाजपा की ओर से केवल पत्थर और डंडे एकत्रित करने का काम किया गया।

भाजपा और आरएसएस के लोग रोजाना सुबह डंडे से अभ्यास करते हैं। उनके लिए डंडा और पत्थर चलाना आसान है।

मामले को ज्यादा तूल नहीं देंगे

इस घटना में भाजपा के एक व्यक्ति की आंख चोटिल हुई है। यह दुखद है, लेकिन कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं के पैर फ्रेक्चर हुए। मीडिया ने इसकी रिपोर्ट नहीं की। इस पूरे घटनाक्रम में केवल एकतरफा रिपोर्टिंग की गई है।

केंद्र सरकार के भू अध्यादेश के खिलाफ देशभर में युवा कांग्रेस की ओर से भाजपा कार्यालयों पर प्रदर्शन किया जा रहा था, लेकिन किसी भी राज्य में हिंसा नहीं हुई। केवल शिमला में ही ऐसी घटना हुई।

रिकार्डिंग में साफ है कि युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बार-बार शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के लिए अनुरोध कर रहे हैं। क्या इस घटना की जांच कराने के बाद सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को तूल देना नहीं चाहती है।

मार्च में शुरू होगा बजट सत्र

हिमाचल प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह से बजट सत्र शुरू होगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुक्रवार को सचिवालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में यह संकेत दिए।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से बजट बनाने का काम चल रहा है। इसके लिए अधिकारी लगे हुए हैं। राज्य की जनता के लिए एक अच्छा बजट पेश किया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश वित्तीय संकट से नहीं गुजर रहा है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक है। विपक्ष की ओर से गलत आरोप लगाया जा रहा है।
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वित्तीय संकट नहीं

वित्तीय संकट होने की स्थिति में विकास कार्य ठप हो जाता। सड़कें बननी बंद हो जाती, लेकिन ऐसा नहीं है। पिछले पांच साल में भाजपा की सरकार ने जितना काम नहीं किया, उससे अधिक काम कांग्रेस की सरकार ने दो साल के भीतर करके दिखा दिया है।

सबसे अधिक स्कूल और अस्पताल खोले गए हैं। हजारों की संख्या में शिक्षकों और अन्य कर्मियों की भर्ती की गई है। अगर वित्तीय संकट होता तो सरकार के लिए इतनी बड़ी योजनाओं को धरातल पर उतार पाना संभव नहीं होता। प्रदेश सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है। चेयरमैनों की तैनाती के सरकार के फैसले को भी सही करार दिया।
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