विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी की कमान को लेकर चल रहीं अटकलों पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा कि वे सरकार में भी रहें और पार्टी संगठन की जिम्मेदारी भी संभालें, इतना उनके पास समय नहीं है। संगठन में हो रही नियुक्तियों पर उन्होंने फिर सवाल उठाते हुए कहा कि संगठन में इलेक्टिड प्रणाली खत्म हो गई है। उनके अनुसार वह भी पांच बार पीसीसी अध्यक्ष रहे।
लेकिन किसी ने उन्हें मनोनीत नहीं किया। चुनाव के माध्यम से ही पार्टी अध्यक्ष बने। अब मनोनयन की प्रथा चली है। जिला अध्यक्ष, सचिव ही नहीं, उनके इर्द-गिर्द जो संगी साथी हैं, वे भी मनोनीत ही हैं। नाहन में मंगलवार को पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी में पहले हैं और मुख्यमंत्री बाद में।
संगठन में पहले सदस्यता होती है। ब्लॉक, जिला और फिर प्रदेश अध्यक्ष का चयन होता है। जो राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चयन करते थे। अब सब मनोनयन पर ही हो रहा है। यह सिर्फ हिमाचल की नहीं, बल्कि पूरे देश की बात है। मंडी के लोगों से पूछा जा सकता है कि वहां का जिलाध्यक्ष वहां रहता है या नहीं। उन्हें जानते भी हो। ब्लॉक और जिलाध्यक्ष बनाने की कोई प्रणाली तो है।