मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शिमला के मैहली में राज्य डाटा केंद्र और सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के नए भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने माना कि यह देश का पहला हरित डाटा केंद्र बन गया है। इससे कागजों का इस्तेमाल नाममात्र का होगा। ऊर्जा की खपत भी कम होगी। उन्होंने लोकमित्र केंद्रों के माध्यम से 101 ई-गवर्नेंस सेवाएं शुरू करने के निर्देश दिए।
कहा कि हिमाचल ऑनलाइन भू-अभिलेख उपलब्ध करवाने वाला भी देश का पहला राज्य बन जाएगा। मुख्यमंत्री ने शिमला शहर के लिए मोबाइल पार्किंग ऐप का शुभारंभ किया। इसे शीघ्र अन्य शहरों में भी शुरू किया जाएगा। डाटा केंद्र के निर्माण पर 58 करोड़ और विभाग के नए भवन के निर्माण पर 8.66 करोड़ की लागत आई है।
मुख्यमंत्री ने ई-जिला परियोजना में राजस्व और कल्याण सेवाओं की प्रस्तुति भी देखी। इसमें विभिन्न विभागों का डाटा बेस संकलित किया गया है। सीएम ने कहा कि प्रदेश का अपना डाटा केंद्र होना गौरव की बात है। ऊर्जा उपयोग क्षमता को बढ़ाकर यह ऊर्जा खपत को कम करता है। कहा कि यह डाटा केंद्र सभी सरकारी विभागों को सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से सृजित आम सूचना तकनीक बुनियादी सुविधाओं का उपयोग करने में मदद करेगा।
इस सेवा का उपयोग करने वाले विभागों को अब सर्वर डाटा बेस की खरीद पर खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। केंद्र यह ऐप सेवा निशुल्क देगा। क्षेत्रीय कार्यालयों तक विभागीय ऐप की पहुंच के लिए हिमस्वान संपर्क प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को अपने स्तर पर अधोसंरचना विकसित करने की बजाय एसडीसी ई-गवर्नेंस ऐप का प्रयोग करने को कहा।
कहा कि सभी विभागों को अपने डाटाबेस का सत्यापन तथा डिजिटाइजेशन के लिए सतत प्रयास करने चाहिए। सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्री विद्या स्टोक्स ने कहा कि विभाग सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन विकसित करने और कार्यान्वित करने के निरंतर प्रयास कर रहा है। अतिरिक्त मुख्य सचिव आईटी संजीव गुप्ता ने कहा कि पार्किंग ऐप एक अनूठी पहल है।
ये भी रहे मौजूद
वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी, विधायक अनिरुद्ध सिंह, महापौर संजय चौहान, उपमहापौर टिकेंद्र पंवर, हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, मुख्यमंत्री के आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल, शहरी विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा, सूचना प्रौद्योगिकी निदेशक संदीप कु मार, नगर निगम शिमला के आयुक्त पंकज राय और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।