मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली से लौटने के बाद सोमवार को प्रेसवार्ता कर कहा कि चार दिन वह बाहर रहे तो यहां कई घटनाक्रम हो गए। उनके पास विमल नेगी के परिवार वालों ने कभी नहीं कहा कि प्रशासनिक जांच भी कीजिए, पर सरकार ने इसे अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार शर्मा से करवाया। सीएम ने कहा कि विमल नेगी की हत्या हुई या मामला आत्महत्या का है, इस मामले में गहनता से जांच करने के आदेश दिए गए। भाजपा इसे जबरन पेखुबेला प्रोजेक्ट से जोड़कर साजिश रच रही है। इस बीच मामले में नेगी का परिवार सीबीआई जांच की मांग के साथ हिमाचल हाईकोर्ट चला गया। परिवार वाले अगर उनके पास भी आते और कहते कि सीबीआई से जांच करवानी है तो वे जरूर करवाते। परिवार का संदेह करना लाजिमी था कि एक रिपोर्ट कुछ और कहती है। दूसरी कुछ और तो तीसरी कुछ और कहती है।
सीएम ने कहा कि जो भी उन्हें रिपोर्ट दे रहे थे, वे पूरा सत्य नहीं बता रहे थे। इस बीच, पुलिस अधिकारियों की आपसी खींचतान भी सामने आई। खींचतान के बीच डीजीपी ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर किया। हलफनामा दायर करने से पहले डीजीपी उनसे मिले और कहा कि एसआईटी को बदल देते हैं। इस पर उन्हें बताया कि भाजपा के लोग मामले में राजनीति कर रहे हैं, इस बीच एसआईटी को बदलना ठीक नहीं है। सीएम ने कहा कि उन्होंने डीजीपी से चर्चा की थी कि मामले को हम खुद ही सीबीआई को दे देते हैं। मुख्य सचिव, डीजीपी और एजी को कहा था जो भी है, बैठकर सच्चाई को सामने लाओ।
कहा, हिमाचल के अधिकारी को जांच टीम में शामिल न करने पर असहमत
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि वह हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से सहमत नहीं हैं कि जांच टीम में हिमाचल काडर का कोई अधिकारी नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जितने भी न्यायाधीश हैं, उनमें भी तो हिमाचल से संबंधित हैं। हम सब कानून और नियम के साथ बंधे हैं।