उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 225 करोड़ रुपये की लागत से 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता वाला यह दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र का कार्य जून, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर और चंबा जिलों के किसानों को लाभ मिलेगा। सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए गंभीरता से प्रयास कर रही है। वह डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए राज्य सरकार ने गाय के दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 61 रुपये प्रति लीटर किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से तीन वर्षों में मिल्कफेड की दूध खरीद में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ऊना जिले के झलेड़ा, हमीरपुर जिले के झलाड़ी, सिरमौर जिले के नाहन, कुल्लू जिला के मोहल, सोलन जिला के नालागढ़ और शिमला जिला के रोहडू में 120 करोड़ रुपये की लागत से छह नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र और दूध शीतन (चिलिंग) संयंत्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों से दूध एकत्रित करने में भी सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री ने मिल्कफेड को निर्देश दिए कि वे पहाड़ी गाय के दूध से बने हिम-घी ब्रांड को प्रोत्साहित करें, जिससे किसानों को लाभकारी मूल्य मिल सके।
गो सदनों की समीक्षा
उन्होंने राज्य में गो सदनों की स्थापना के लिए चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की तथा इनके कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. कर्नल धनी राम शांडिल, पशुपालन मंत्री चंद्र कुमार, विधायक चंद्रशेखर, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार, सचिव पशुपालन रितेश चौहान, निदेशक पशुपालन डॉ. संजीव धीमान, प्रबंध निदेशक मिल्कफेड विकास सूद भी बैठक में उपस्थित थे।