मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मशाला, मंडी, सोलन, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना और बद्दी जैसे शहरी स्थानीय निकाय तेजी से आर्थिक और मानव संसाधन विकास के केंद्र बन रहे हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश को योजना के लाभ लेने के लिए मौजूदा मानदंडों में ढील दी जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदल रही है। सरकार ने 1500 डीजल बसों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत राज्य सरकार अपने संसाधनों से कैपिटल एक्सपेंडिचर मॉडल की 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद कर रही है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश में ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर मॉडल के तहत माइलेज को कम कर 150 किलोमीटर तक सीमित करने का आग्रह किया, जो हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए एक व्यावहारिक लक्ष्य होगा।
उन्होंने वर्तमान संचालन सहायता को 22 रुपये प्रति किलोमीटर से 52 रुपये प्रति किलोमीटर करने का भी आग्रह किया, जिससे राज्य परिवहन निगम बिना हानि के इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सुनिश्चित कर सके। उन्होंने हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के एकीकृत कार्यालय के लिए सुंदरनगर में उपलब्ध 47 बीघा भूमि के हस्तांतरण एवं आवंटन के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने और समान प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूंजी सहायता को वास्तव में प्राप्त माइलेज के आधार पर दिया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने राज्य को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी मौजूद रहे।