इससे पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट के लिए पूर्व की सरकार जिम्मेदार है जिसने कभी भविष्य में जल संकट की स्थिति के लिए कोई तैयारी नहीं की थी। इस अवसर पर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेन्द्र सिंह ठाकुर ने प्रदेश में जलापूर्ति योजनाओं की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव राम सुभग सिंह, सचिव आईपीएच देवेश कुमार, शिमला के उपायुक्त अमित कश्यप, नगर निगम शिमला के आयुक्त रोहित जम्वाल, मुख्यमंत्री के ओएसडी महेन्द्र धर्माणी, शिशु धर्मा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार त्रिलोक जम्वाल, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रोहित
सावल, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के इंजीनियर इन चीफ विक्रांत सुमन उपस्थित थे। वहीं, बैठक के बाद सिंचाई मंत्री ने कहा कि समय सारणी का कड़ाई से पालन हो और कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकरियों व कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिमला में जल संकट से निपटने व निगरानी के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी छह सदस्यीय कमेटी जल स्त्रोतां का दौरा करने के साथ साथ ऐसे स्थानों को चिह्नित कर रही है जहां पर बोरवेल स्थापित किए जा सके।
सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पम्पिंग स्टेशनों पर जल की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। कमेटी प्रतिदिन जलापूर्ति बढ़ाने का प्रयास कर रही है जिसकी वजह से पिछले सात दिन में 7 एमएलडी जलापूर्ति बढ़ी है तथा
आज शिमला शहर के लिए 28.47 एमएलडी पानी उपलब्ध हुआ है। उधर, जल टैंकों के साथ टुल्लू पंप भी जोड़े जा रहे हैं जिससे ऐसे क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति होगी जहां पर सड़कें उपलब्ध नहीं है तथा टैंकर नहीं पहुंच सकते हैं।
जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, नगर निगम, शहरी विकास तथा पुलिस विभाग की एक समन्वय समिति बनाई है।
साथ ही शिकायत दर्ज करने के लिए 1077 टोल फ्री नंबर शुरू किया गया है। वहीं, कंट्रोल रूम में आने वाली शिकायतों की एक कंट्रोल कक्ष के माध्यम से निगरानी की जा रही है।
उधर, प्रदेश पर्यटन विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रदेश सरकार ने पर्याप्त इंतजाम किए हैं। बताया कि पानी की कमी है लेकिन इस स्थिति पर मुख्यमंत्री व वरिष्ठ अधिकारियों सहित स्वयं नजर रखे हुए है।
बताया कि तमाम प्रयासों के जरिये जल की उपलब्धता में प्रतिदिन बढ़ोतरी हो रही है तथा वर्षा से राहत मिलने के साथ.साथ जल स्तर में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दोहराया कि होटलों में पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है तथा पर्यटकों की सुविधा में कोई कमी नहीं बरती जा रही है।