आवश्यकता को देखते हुए सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा धारा 118 पर की जा रही बयानबाजी पर कहा कि कांग्रेस के इस विरोध-प्रदर्शन से प्रदेश सरकार का कोई लेनादेना नहीं है।
बड़ी तादात में कांग्रेस के लोग भी संपर्क कर इसके सरलीकरण के पक्ष में बोल रहे हैं। देश में जम्मू कश्मीर के अलावा और कहीं भी धारा 118 जैसे कठिन नियम नहीं हैं। चूंकि जेएंडके में अलग व्यवस्था और परिस्थितियां हैं।
जयराम ने कहा कि इसमें भी प्रदेश की जनता के हितों की सुरक्षा सर्वोपरि है। प्रदेश के हितों को और पुख्ता तरीके से सुरक्षित रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विपक्ष के लोगों को इसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। बहुत बड़े प्रोजेक्ट्स प्रदेश में जिस गति से आगे बढ़ना चाह रहे हैं, उसमें कई दिक्कतें पेश आ रही हैं।
इसलिए धारा 118 के सरलीकरण की आवश्यकता है। बाहर से जो निवेशक सूबे में आना चाहते हैं, वे कठिन नियमों के कारण रास्ते से मुड़ जाते हैं जिससे प्रदेश के बेरोजगारों के लिए रोजगार के दरवाजे बंद हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इसे खत्म नहीं कर रही बल्कि इसे सरलीकरण के लिए जनता के सामने खोला जा रहा है। प्रदेश को विकास की राह में आगे बढ़ाना है तो इस तरह के निर्णय लेने ही होंगे।
विपक्ष के आरोपों पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आरएसएस भाजपा का मार्गदर्शक रहा है और इसकी अहम भूमिका है। लेकिन प्रदेश में सरकार को भारतीय जनता पार्टी की सरकार और और भाजपा चला रही है। विपक्ष के कहने का कोई अर्थ नहीं। उनको कुछ भी कहना होता है, इसलिए इस तरह के बयान दे रहे हैं।
विधानसभा बजट सत्र शुरू होने से पहले प्रदेश सरकार ने कैबिनेट बैठक बुलाई है। यह बैठक 3 मार्च को दोपहर 3:00 बजे होगी। इसमें राज्यपाल के अभिभाषण के अलावा बजट सत्र में पेश किए जाने वाले विधेयक के ड्राफ्ट को मंजूरी दी जा सकती है।
हिमाचल विधानसभा सत्र 6 मार्च से शुरू होगा और 9 मार्च को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर बजट पेश करेंगे। मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को भरने के अलावा कंडक्टर भर्ती मामले पर चर्चा होगी।