सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार प्रदेश सहकारी समिति एक्ट 1968 को अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए इस कानून में संशोधन करने के लिए कैबिनेट मंत्रियों की समिति बनाने पर विचार कर रही है। जय राम ठाकुर ने गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) विशेषकर कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक पर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि किसानों को एक ही छत के नीचे विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को नाबार्ड के सहयोग से बहुउद्देश्य सेवा केंद्र बनाने पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह बात मंगलवार को सहकारिता विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि इन समितियों को सुदृढ़ करने के प्रयास किए जाने चाहिए ताकि राज्य के किसान लाभान्वित हो सकें। सोलन, मंडी जिले में क्रमश: 73.15 करोड़ रुपये और 89.58 करोड़ रुपये की लागत से दो आईसीडीपी परियोजनाएं लागू की जा रही हैं।
मंडी जिले की परियोजना को राज्य सहकारी बैंक की ओर से लागू किया जा रहा है। सोलन जिले की आईसीडीपी परियोजना जोगिंद्रा केंद्रीय सहकारी बैंक सोलन की ओर से लागू की जा रही है। 46.47 करोड़ रुपये की लागत से ऊना जिले के लिए आईसीडीपी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट राष्ट्रीय सहकारिता विकास कमेटी की स्वीकृति के लिए भेजा गई है।
सहकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने सहकारिता आंदोलन को सुदृढ़ बनाने में रुचि दिखाने के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया। मुख्य सचिव अनिल खाची, प्रधान सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जेसी शर्मा, सचिव सहकारिता अक्षय सूद, पंजीयक सहकारिता समिति डॉ. अजय शर्मा इस दौरान मौजूद रहे।