सीएम जयराम ने सुना 'मन की बात' कार्यक्रम
- फोटो : ANI
‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के स्पीति क्षेत्र में आपसी सहयोग भी लोक परंपरा का हिस्सा है। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कुछ समय पूर्व उन्हें ‘मन की बात’ के एक श्रोता रमेश का पत्र मिला। रमेश ने कहा कि पहाड़ों मेें बस्तियां बेशक दूर-दूर हों, मगर लोगों के दिल एक-दूसरे के बहुत नजदीक होते हैं। मोदी ने कहा कि वाकई लोग पहाड़ों पर रहने वालों के जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हैं। पहला सबक तो यही मिलता है कि वे परिस्थितियों के दबाव में न आएं और आसानी से उन पर विजय भी प्राप्त कर सकते हैं।
दूसरा, यह कि कैसे वे स्थानीय संसाधनों से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। मोदी ने कहा कि जिस पहली सीख का जिक्र किया गया है, उसका पहला चित्र इन दिनों स्पीति में देखने को मिलता है। यह एक जनजातीय क्षेत्र है। इन दिनों यहां पर मटर तोड़ने का काम चलता है। पहाड़ी खेतों पर एक मेहनत भरा मुश्किल काम होता है, लेकिन गांव की महिलाएं इकट्ठा होकर एक साथ मिलकर एक-दूसरे के खेतों से मटर तोड़ती हैं। इस काम के साथ-साथ महिलाएं स्थानीय गीत ‘छपरा माजी छपरा’ भी गाती हैं। यानी यहां आपसी सहयोग भी लोक परंपरा का हिस्सा है। स्पीति में स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग का भी बेहतरीन उदाहरण मिलता है।
स्पीति में किसान जो गाये पालते हैं, उनके गोबर को सुखाकर बोरियों में भरा जाता है। जब सर्दियां आती हैं तो इन बोरियों को गाय के रहने की जगह में जिसे यहां खूड कहते हैं, वहां बिछा दिया जाता है। बर्फबारी के बीच ये बोरियां गायों को ठंड से सुरक्षा देती हैं। सर्दियां जाने के बाद यही गोबर खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यानी पशुओं के व्यर्थ पदार्थ से सुरक्षा भी और खेतों के लिए खाद का भी इस्तेमाल होता है। वहीं, तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने कहा कि प्रधानमंत्री के जिक्र से लाहौल स्पीति जिला के मटर को और भी पहचान मिलेगी।