मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान हुए दुराचार व हत्या के मामलों से पुलिस की छवि बेहद खराब हुई है। नई सरकार से लोगों को ज्यादा उम्मीद रहती है, ऐसे में उस बिगड़ी छवि को सुधार कर लोगों की सुनवाई और मदद करने पर फोकस करना होगा।
उन्होंने प्रदेश में सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर चिंता जताई। कहा कि विभाग इस संख्या को कम करने के लिए ठोस रणनीति बनाए और शराब पीकर या मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने वालों पर सख्ती करे। बैठक में मुख्य सचिव विनीत चौधरी, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री मनीषा नंदा के अलावा कई अधिकारी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने महिला सुरक्षा पर खासा जोर दिया। तय हुआ कि 27 जनवरी को गुड़िया हेल्पलाइन और शक्ति बटन मोबाइल ऐप शुरू किया जाएगा। इसकी खासियत होगी कि बटन दबते ही फोन कॉल तब तक डिसकनेक्ट नहीं होगी, जब तक पुलिस महिला तक पहुंच न जाए।
इसके अलावा उन्होंने होशियार हेल्पलाइन को भी शुरू करने के निर्देश दिए। हालांकि, उन्होंने महिला हेल्पलाइन नंबर पर ही गुड़िया हेल्पलाइन शुरू करने पर चुटकी लेते हुए यह जरूर कहा कि सिर्फ नाम बदलकर योजना न शुरू की जाए, बल्कि अफसर इस पर ध्यान दें कि नई योजना नई और प्रभावी हो।
सीएम ने कहा कि पुलिस हर हाल में सौ दिन में 112 राष्ट्रीय आपात प्रतिक्रिया नंबर शुरू कर दे, ताकि इमरजेंसी होने पर लोगों कोे अलग-अलग नंबर न मिलाने पड़े। 112 नंबर पर ही आने वाले दिनों में एंबुलेंस, फायर और पुलिस के लिए लोग कॉल कर मदद ले सकेंगे।
प्रदेश में जल्द पॉलीग्राफ टेस्ट की व्यवस्था शुरू करने के भी प्रयास करने को कहा। उन्होंने नगर निगम व आईपीएच विभाग के साथ मिलकर फायर हाइड्रेंट्स को सही रखने के लिए निर्देश दिए।
नहीं हुई केस वापस लेने पर चर्चा
मुख्यमंत्री ने हाल ही में राजनीतिक द्वेष से दर्ज किए मुकदमों को वापस लेने का एलान किया था। मंगलवार की बैठक में ऐसे मामलों पर चर्चा के बाद उन्हें वापस लेने पर निर्णय होना था, लेकिन किसी भी मामले को वापस लेने पर चर्चा नहीं हुई। दरअसल, सुप्रीमकोर्ट ने भी सरकार से पूछा था कि क्या वह एचपीसीए का मामला वापस लेगी। इसके बाद माना जा रहा था कि बैठक में सरकार इस पर फैसला ले सकती है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई गृह विभाग की समीक्षा बैठक में निर्णय हुआ कि अब सूबे के हर जिले के पांच स्कूलों के बच्चों को पुलिस कैडेट के तौर पर तैयार किया जाएगा। केंद्र सरकार की स्टूडेंट पुलिस कैडेट स्कीम के तहत इस योजना को शुरू किया जाएगा।
इसमें शामिल होने वाले बच्चों को ट्रैफिक, नशा निवारण और कानून व्यवस्था की जानकारी देकर पुलिस के मददगार के तौर पर तैयार किया जाएगा। यह योजना स्काउट गाइड और एनसीसी की तर्ज पर शुरू की जाएगी।
डीजीपी एसआर मरडी ने बताया कि इससे न सिर्फ बच्चों में कानून की समझ व उसके प्रति सम्मान जागेगा, बल्कि वह भी दूसरों को कानून का पालन करने के लिए पुलिस का सहयोग कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि पहले चरण में हर जिले में पांच पांच स्कूलों के बच्चों को चुना जाएगा।
इसके बाद अगले चरण में औैर स्कूलों में इस योजना को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों में बढ़ते नशे की लत के खिलाफ इस योजना के तहत प्रभावी तरीके से काम करने में काफी मदद मिल सकेगी।