स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार
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केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के सुंदरनगर और नालागढ़ शहरों को दूसरे और तीसरे स्थान के लिए स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2022 पुरस्कार प्रदान किया। इन दोनों शहरों के लिए क्रमश:25 लाख और 12.50 लाख रुपये पुरस्कार राशि मिली है। मध्य प्रदेश का देवास पहले स्थान पर रहा। देश के 42 शहरों के बीच मुकाबला था। हिमाचल ने तीन लाख से कम की आबादी वाले शहरों के मुकाबले में बाजी मारी है।
शनिवार को ओडिशा के राज्यपाल प्रोफेसर गणेशी लाल और केंद्रीय मंत्री पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने पुरस्कार प्रदान किए। भुवनेश्वर ओडिशा में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. मनोज चौहान ने राज्य की ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किए। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सदस्य सचिव अपूर्व देवगन ने कहा कि हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या परिवेशी वातावरण में पीएम 10 की उच्च स्तर की थी। इस कारण इन शहरों, कस्बों को गैर-प्राप्ति शहरों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। राज्य ने सभी हितधारक विभागों को शामिल करके बहुआयामी रणनीति अपनाई।
देवगन ने कहा कि राज्य के मुख्य सचिव पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की अध्यक्षता वाली वायु गुणवत्ता निगरानी समिति ने कार्य योजना के कार्यान्वयन की प्रभावी आवधिक समीक्षा की थी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ-साथ संबंधित जिलाधिकारियों की अध्यक्षता वाली शहर स्तरीय कार्यान्वयन समिति के प्रयासों से परिवेशी वातावरण में 40 प्रतिशत से अधिक पीएम 10 की सघनता को कम करने में सफलता मिली है। राज्य में वायु गुणवत्ता में सुधार राज्य का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) भी आधार वर्ष 2017 के 81 से घटकर 2021-22 के दौरान 61 हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 131 गैर प्राप्ति शहरों, कस्बों में वायु गुणवत्ता की रोकथाम के लिए 2018 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत की।