एनएच से लेकर विवि गेट तक निकाली विरोध में रैली अमर उजाला ब्यूरो शिमला। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय घंडल शिमला से 64 दैनिक भोगी कर्मचारियों को निकालने के विरोध में दैनिक भोगी कर्मचारियों ने सोमवार को विवि के मुख्य गेट के बाहर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय ने गैर कानूनी तरीके से उन्हें हटाया है, मामला कोर्ट होते हुए विवि ने आउटसोर्स पर नई भर्तियों कीं। सीटू के बैनर तले जुटे इन कर्मचारियों ने फैसले को वापस लेकर उन्हें नौकरी पर रखे जाने की मांग के समर्थन में नारेबाजी की। दैनिक भोगी कर्मचारियों ने एनएच पर एक होकर विवि के गेट तक विरोध रैली निकाली।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी मुख्य गेट पर बैठ गए और दो घंटे तक धरना दिया। सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, जिला कोषाध्यक्ष बालक राम, विवेक कश्यप, कर्मचारियों में रामप्रकाश, आशा, पंकज, हेमराज, रजनीश, चंद्रमोहन, हेमंत, धर्मेंद्र, रणधीर, मीरा, राजेश, दुर्गादत्त, पुष्पेंद्र, ज्योति, रामप्यारी, रचना, चंदन, हेमा, दीपशिखा, अनीता, निर्मला, जीत, सोहन लाल, हनींद्र और अनूप ने विवि के इस फैसले को तानाशाहीपूर्ण करार दिया। सीटू नेताओं ने चेताया कि अगर हटाए गए कर्मचारियों और मजदूरों की सेवाओं को बहाल न किया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि छात्रों को कानून की पढ़ाई करवाने वाले विधि विश्वविद्यालय में सरेआम कानून की अनदेखी कर नौकरी से हटाने के फरमान जारी कर रहा है। मजदूरों को हायर एंड फायर नीति के तहत गैर कानूनी तरीके से नौकरी से निकाल रहा है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
कई सालों से सफाई, सुरक्षा, हॉस्टल अटेंडेंट, ड्राइवर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन सहित तकनीकी कर्मी के रूप में विश्वविद्यालय में कार्यरत थे। इन मजदूरों को केंद्र सरकार का न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जा रहा था। इनसे बारह घंटे तक कार्य करवाया जाता था। इन्हें ओवरटाइम तक नहीं दिया जाता था, न ही ईपीएफ, ईएसआई, मेडिकल और छुट्टियों की कोई भी सुविधा दी जाती थी। इन कर्मचारियों की नियुक्ति पूर्ण प्रक्रिया को अपनाते हुए साक्षात्कार के जरिये की गई थी। अब इन्हें बिना कारण बिना नोटिस के नौकरी से निकालना देश के कानून के विरुद्ध है। उन्होंने मांग उठाई कि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से नौकरी से निकाले गए 43 कर्मचारियों को तुरंत बहाल किया जाए। कर्मचारियों को 90 दिन बाद ब्रेक देना बंद करें।