लोगों और पक्षियों के लिए जान का खतना बन चुके चाइनीज मांझे पर हिमाचल सरकार ने रोक लगाने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में राज्य सरकार को जरूरी कदम उठाने के लिए निर्देश जारी किए थे।
इसके बाद अब राज्य सरकार चाइनीज मांझे पर प्रदेश में पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी में हैं। प्रदेश के सिरमौर, ऊना और सोलन में बड़े पैमाने पर पतंगबाजी होती है। लोगों के इस शौक से कबूतर, कौवा, उल्लू, गिद्धों के लिए संकट खड़ा हो गया है।
दरअसल, लोग पतंग उड़ाते समय चाइनीज मांझों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन यह मांझे लोगों और पक्षियों की जान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। कई वन्यजीव संगठनों की पहले के बाद अब केंद्र सरकार ने सभी प्र्रदेशों की सरकारों को इस उत्पाद के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
विभागीय सूत्रों ने बताया कि पत्र में चाइनीज मेक के मांझे के अलावा आयरन पाउडर, ग्लास पाउडर जैसे उत्पादों से बने मांझे को भी इस्तेमाल न करने देने के लिए कहा गया है। साथ ही पत्र में पर्यावरण, वन, नदी, तालाब और वन्यजीवों की रक्षा को हर भारतीय की संवैधानिक जिम्मेदारी बताते हुए इन्हें बचाने का प्रयास करने को कहा गया है। ऐसे में अब वन विभाग प्रदेशभर में चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने कवायद में जुट गया है।
बहिष्कार के बावजूद बाजारों पर ‘ड्रैगन’ का कब्जा
वहीं, चाइना के सामान से बाजार अटे पड़े हैं। दिवाली को लेकर हर तरह का चाइनीज सामान शिमला के बाजार में दस्तक दे चुका है। भारत के खिलाफ चीन की गतिविधियों के चलते देश में व्यापारी और आम लोग चाइना के सामान का कितना बहिष्कार कर रहे हैं।
इस बात की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने शिमला शहर के बाजारों के कारोबारियों और आम जनता से बातचीत की। चीनी लड़ी, खिलौने या फिर मोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स की बात हो, मेड इन चाइना के सामान से बाजार अटे पड़े है।
इनकी बिक्री भी खूब हो रही है। कारोबारी भी चाइना के सामान को बेचकर खूब चांदी कूट रहे हैं। गिनती के व्यापारी ही चाइना का हल्का सामान होने के कारण सिर्फ मेड इन इंडिया का सामन बेच रहे हैं।
ये है चाइनीज सामान ज्यादा बिकने का कारण
अधिकतर कारोबारियों का कहना है कि जब देश की राजधानी दिल्ली में ही मेड इन चाइना का माल मिल रहा है तो मेड इन इंडिया का सामन कहां से बेचें। चीन का माल बाजार में सस्ते दरों में उपलब्ध है साथ ही यह आकर्षक भी है।
मेड इन इंडिया की वही चीज तीन से चार गुना ज्यादा कीमत पर बिक रही है। लिहाजा उपभोक्ता सस्ती और आकर्षक चीजों को खरीदना पसंद करते हैं। यही वजह है कि बाजार में सस्ती दरों पर उपलब्ध चीनी उत्पादों की बिक्री खूब हो रही है।
यही वजह है कि शिमला के बाजारों में चीनी सामान को लेकर हो रही खींचतान का कोई असर नहीं पड़ रहा है। इसी बीच पांच प्रतिशत कारोबारी ऐसे भी है जो सिर्फ मेड इन इंडिया का सामान बेच रहे हैं। उनका कहना है कि चाइना का सामान सस्ता और हल्का होता है इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
ज्यादातर चीन का सामना आ रहा है इंडिया में
शिमला व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह का कहना है कि इंडिया में ज्यादातर सामना चाइना से आ रहा है। उन्होंने बताया कि बाहर डिब्बों में मेक इन इंडिया लिखा होता है लेकिन अंदर से सामान मेड इन चाइना का होता हैं। उन्होंने बताया कि एक हिंदुस्तानी होने के नाते वो मेड इन इंडिया का सामन खरीदने के लिए ग्राहकों को प्रोत्साहित करते हैं।
चाइनीज खिलौने पसंद करते है बच्चे
लोअर बाजार के खिलौने के कारोबारी सन्नी का कहना है कि चाइनीज खिलौने आकर्षक होते हैं इसलिए बच्चे इन्हें पसंद करते है साथ ही इंडियन खिलौने के मुकाबले चाइनीज खिलौने सस्ते भी होते हैं। इसलिए अभिभावक बच्चों को चाइनीज खिलौने की ज्यादा खरीददारी करते हैं।
कुछ कारोबारी नहीं बेच रहे चाइनीज माल
लोअर बाजार के कारोबारी क वल कपूर ने बताया कि वह अपनी दुकान में सिर्फ इंडियन सामान बेचते हैं और प्राथमिकता भी इंडियन सामान को ही देते हैं। उन्होंने बताया कि चाइना का सामना की कोई गारंटी नहीं होती कि कब खराब हो जाए इस से ग्राहकी खराब होती है।
सस्ती है चाइनीज आइटम
लोअर बाजार के एक व्यापारी का कहना है उभननके पास सारा सामान चाइनीज है। चाइनीज सामान इंडियन सामान के मुकाबले काफी सस्ता है और ग्राहक भी इस सामान की ज्यादा खरीददारी करता है।