पीएम मोदी भले ही चीन की यात्रा कर दोनों देशों के संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हों लेकिन चीन भारत के बारे में क्या सोचता है, इसका एक ताजा पहलू सामने आया है। चीन ने भारत को कभी बराबरी में नहीं माना। यह खुलासा चीन के एक शोधार्थी चाओ झी ने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में ‘भारत के परिदृश्य में हथियारों का नियंत्रण तथा नि:शस्त्रीकरण’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोध पत्र प्रस्तुत कर किया।
उन्होंने इस शोध पत्र में स्पष्ट किया कि चीन के रणनीतिकार मानते हैं कि भारत की बनावटी नीति इसके आर्थिक एवं मिलिट्री पोटेंशियल को सीमित करती रहेगी। चीन में अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के तहत छिंगुआ यूनिवर्सिटी में डेवलपिंग कंट्री स्टडीज विषय में शोध कर रहे चाओ झी ने एक शोध पत्र पढ़ा।
भारत के न्यूक्लीयर हथियारों से संबंधित परिचय को भी चीन अंडरप्ले कर रहा है। हालांकि, चीन को ऐसे करते रहना मुश्किल में डालता जा रहा है। फिर भी भारत से परमाणु खतरे पर चीन को ध्यान देने की जरूरत है।