भारत-तिब्बत मैत्री सहयोग मंच के वरिष्ठ सलाहकार एवं उपसभापति निर्वासित तिब्बत संसद आचार्य येशी फुंछोक ने कहा कि उत्तराखंड के चमोली में हाल ही में आई आपदा के पीछे भी चीन का हाथ है। पारछु झील टूटने से किन्नौर में आई बाढ़ के पीछे भी चीन का ही हाथ था। तिब्बत में कोई ऐसी झील नहीं है, इस झील को बनाया गया है। कोरोना भी चीन की बनाई हुई आपदा है। चीन अब तो दलाईलामा के अवतार को लेकर भी हस्तक्षेप करने लगा हुआ है। फुंछोक ने कहा कि तिब्बतियन समुदाय को भारत सरकार का लगातार सहयोग मिल रहा है। तिब्बत के बाद अब चीन भारत के क्षेत्र पर भी कब्जा करना चाह रहा है, इसलिए भारत-तिब्बत सीमा पर बार-बार विवाद पैदा कर रहा है। तिब्बत को आजाद करवाने के लिए विश्वभर में संघर्ष जारी है।
तिब्बत में ही 40 लाख लोग आजादी के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। पूरे विश्व भर में 250 से अधिक तिब्बत सहयोग समूह गठित हैं। मंडी जिला में भी रिवालसर, मंडी, पंडोह, कुल्लू और मनाली में ऐसे समूह गठित हैं। चीन तिब्बत की संस्कृति को नष्ट करने में लगा हुआ है। तिब्बत में आठ हजार से अधिक मठों की सांस्कृतिक विरासत को नष्ट किया जा रहा है। आज भी पांच हजार से अधिक तिब्बतियन चीन की जेलों में बंद हैं। 15 वर्ष के युवा आज भी बलिदान कर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि डोकलाम, लद्दाख में वर्तमान हालातों को लेकर हम पहले भी बोलते रहे लेकिन तब कोई नहीं मानता था। आज सारी बातें सामने आ चुकी हैं। भारत में तिब्बत की संस्कृति और तिब्बतियन को संरक्षण मिला है। इस मौके पर भारत-तिब्बत मैत्री संघ के सचिव दिनेश कुमार व अन्य मौजूद रहे।