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Himachal News: मुख्य संसदीय सचिवों के पास रहेगी केवल सुझाव देने की शक्ति

Mon, 09 Jan 2023 12:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

विधायकों के तुष्टिकरण के लिए मुख्य संसदीय सचिव बनाने का यह फार्मूला वर्ष 2003 के बाद लाया गया था। उस वक्त वर्तमान उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया था।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में नए बनाए गए मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) के पास केवल सुझाव देने की शक्ति ही रहेगी। इनके लिए विभागों के स्वतंत्र प्रभार देकर मुख्यमंत्री सुक्खू को रिपोर्ट करने का फार्मूला लाने की भी तैयारी है। मंत्रियों की तय सीमा पूरा होने के कारण ही राज्य में मुख्य संसदीय सचिव बनाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री बनाने के बाद मंत्री तो केवल 12 ही बनाए जा सकते हैं।

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मंत्री न बनाए जाने से विधायक नाराज न हों, इसलिए इस बार भी मुख्य संसदीय सचिव बनाने का यह फार्मूला अपनाया गया है। एक साथ छह विधायकों को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह ने मुख्य संसदीय सचिवों की शपथ दिलाई। विधायकों के तुष्टिकरण के लिए मुख्य संसदीय सचिव बनाने का यह फार्मूला वर्ष 2003 के बाद लाया गया था। उस वक्त वर्तमान उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को मुख्य संसदीय सचिव बनाया गया था। कुछ अन्य संसदीय सचिव भी बनाए गए थे।

उस वक्त यह मामला कोर्ट में विवादित हो गया था। सीएम सहित 12 कैबिनेट मंत्रियों को बनाने की तय सीमा के पूरा होने के बाद लाभ के पदों पर बैठाए जाने का मुद्दा उठा तो सरकार ने इस बारे में 2007 में एक कानून बनाया। इसके बाद धूमल सरकार में भी सुखराम चौधरी और कुछ अन्य विधायकों को ऐसे पद दिए गए। पिछली वीरभद्र सरकार में फिर से मुख्य संसदीय सचिव बनाए गए।
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वर्तमान मंत्री रोहित ठाकुर भी मुख्य संसदीय सचिव नियुक्त किए गए थे। रोहित ठाकुर के पास कृषि विभाग था तो वह इस महकमे से संबंधित केवल सुझाव ही दे सकते थे। उस वक्त कृषि मंत्री सुजान सिंह पठानिया थे। इस पद के मिलने के बाद सचिवालय में बैठने को कमरे, स्टाफ और गाड़ी मिल जाती है। मुख्य संसदीय सचिव विभागीय फाइलें अपने पास मंगवा सकते हैं। 

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