मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में आईटी के अधिक से अधिक उपयोग पर भी बल दिया जा रहा है। इससे न्यायिक व्यवस्था सुदृढ़ एवं दक्ष होगी और आम आदमी को त्वरित न्याय मिलेगा। उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में ई-फाइलिंग सिस्टम शुरू कर दिया गया है और अभी तक लगभग 68 हजार केसों की ई-फाइलिंग हो चुकी है। न्यायालयों में ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी आरंभ की गई है। प्रदेश के कई जिलों में वर्चुअल कोर्ट भी शुरू किए गए हैं। इस अवसर पर न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा ने अपने संबोधन में हमीरपुर जिले की न्यायिक व्यवस्था के इतिहास पर प्रकाश डाला और भोरंज में न्यायिक परिसर के लिए भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया के लिए प्रशासन का धन्यवाद किया।
इससे पहले, जिला एवं सत्र न्यायधीश विकास भारद्वाज ने अपने संबोधन में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश, अन्य न्यायधीशों और अन्य सभी अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि भोरंज में लंबे समय से सिविल जज कोर्ट की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब यहां कोर्ट खुल जाने से क्षेत्रवासियों को घर द्वार पर ही न्याय सुलभ होगा। इस अवसर पर बार एसोसिएशन भोरंज के उपाध्यक्ष सुरेश चंद गुलेरिया और अन्य पदाधिकारियों ने मुख्य न्यायाधीश और अन्य सभी अतिथियों का एसोसिएशन की ओर से अभिनंदन किया। एडवोकेट पंकज भारद्वाज ने धन्यवाद संबोधन प्रस्तुत किया।
समारोह में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल जेके शर्मा, मुख्य न्यायाधीश के पीपीएस बीएल सोनी, जिलाधीश अमरजीत सिंह, एसपी पदम चंद, जिला न्यायवादी संदीप अग्निहोत्री, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश सचिन रघु, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूर्य प्रकाश, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विशाल भमनोत्रा, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के सचिव एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी असलम बेग, नादौन की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दिव्य ज्योति पटियाल, न्यायिक दंडाधिकारी वत्सला चौधरी, शाविक घई और अनुलेखा तंवर, बड़सर की न्यायिक दंडाधिकारी मनु प्रिंजा, एसडीएम संजय स्वरूप, एसडीपीओ सचिन हीरेमथ, अन्य अधिकारी, बार एसोसिएशन भोरंज के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे।