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हिमाचल: 'पहाड़ का जहाज' के नाम से जाना जाता है इस नस्ल का घोड़ा, माइनस तापमान में भी आसानी से करता है काम

संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 15 Nov 2022 12:41 PM IST

सार

इस बार चार दिवसीय मेले के दौरान स्पीति, किन्नौर और रामपुर से 200 के करीब घोड़ों का पंजीकरण हुआ जिसमें अधिकतर घोडों को उत्तराखंड से आए व्यापारियों ने अच्छे दामों में खरीदा।
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चामुर्थी घोड़ा। - फोटो : संवाद


पिन घाटी के लोगों का कहना है कि यह संभवत तिब्बत के जंगली अश्वों से विकसित हुआ है। दरअसल, चामुर्थी तिब्बत में एक गांव है और इसी गांव के नाम पर इस अश्व का नाम पड़ा है। बताया जाता है कि आज से करीब 400 साल पहले जब भारत-तिब्बत व्यापार शिपकी ला से होता था। तब वहीं से यह नस्ल स्पीति में आई।  इसकी शुद्ध नस्ल मुख्य रूप से स्पीति की पिन घाटी में पाई जाती है।


इस नस्ल की कई खूबियां हैं, जिनके कारण यह स्पीति किन्नौर के शून्य और कम तापमान, ऊंचाई और दुर्गम क्षेत्रों में भी सुगमता से अपना कार्य करता है। अति ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जहां ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम होती है, वहां भी काम आसानी से करता है।  इसकी टांगों की लंबाई कम होती है, जिसके कारण अपना संतुलन पहाड़ी क्षेत्रों में बनाए रखता है।


इन्हीं गुणों के कारण तिब्बत सीमा पुलिस बल चामुर्थी घोड़े का सीमा के अति दुर्गम क्षेत्रों में सामान की ढुलाई के लिए करते हैं। इस बार चार दिवसीय मेले के दौरान स्पीति, किन्नौर और रामपुर से 200 के करीब घोड़ों का पंजीकरण हुआ जिसमें अधिकतर घोडों को उत्तराखंड से आए व्यापारियों ने अच्छे दामों में खरीदा। जिसमें स्पीति के नमज्ञाल का चामुर्थी घोड़ा सबसे अधिक 57,500 रुपये में बिका।

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