मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
- फोटो : अमर उजाला
प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए हिमाचल में अपनी वेधशाला (ऑब्जरवेटरी) बनेगी। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में दो डाप्लर रडार भी स्थापित किए जाएंगे। वीरवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद की ओर से करवाई कार्यशाला के दौरान संबोधन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑब्जरवेटरी और डाप्लर रडार स्थापित करने के लिए केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू से निजी तौर पर बात की है।
अगर केंद्र सरकार इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं करवाती तो सरकार अपने खर्च पर यह काम करेगी। आपदा प्रबंधन के लिए वर्ल्ड बैंक को 800 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भेजा है। उम्मीद है जल्द इसकी मंजूरी मिलेगी। भूकंप के लिहाज से हम तैयार नहीं हैं। प्रदेश में निर्माण के नियम बदलेंगे। हमें भी अपना स्वभाव बदलना पड़ेगा। ड्रेनेज सिस्टम सुधारना पड़ेगा। हिमाचल में बादल फटना, बांधों का पानी और भारी बारिश बरसात आपदा का कारण बने।
मनाली में बादल फटने से ब्यास में बाढ़ आई, नदी में आए पत्थर घरों को बहा ले गए। लारजी बांध का पानी छोड़ना पड़ा। जिससे मंडी में नुकसान हुआ। पौंग बांध का पानी छोड़ना पड़ा तो इंदौरा-फतेहपुर में ब्यास ने नुकसान किया। एडवांस्ड स्टडी से पानी मलबे को बहाकर लाया। इससे देवदार के पेड़ उखड़ गए और शिव मंदिर को चपेट में ले लिया। एडवांस्ड स्टडी में इतना पानी कहां से आया यह बड़ा सवाल है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरे विश्व के समक्ष चुनौती है, जहां कभी बारिश नहीं होती थी, वहां बारिश हुई है। हालांकि भूस्खलन को लेकर संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर इसके नुकसान को रोका जा सकता है। हिमाचल में बादल फटने की घटनाएं क्यों बढ़ी, इसकी अध्ययन होना चाहिए।
बड़सर में बिना बादल फटे 100 मीटर का नाला बन गया। वह स्टडी होना चाहिए। भू वैज्ञानिकों से इसका अध्ययन करने को कहा है। ड्रेनेज सिस्टम, नाले नदियों के किनारे निर्माण के नियम बनाने की सरकार तैयारी कर रही है। अब हिमाचल में सब कुछ सामान्य है, सैलानियों का स्वागत है।