फीस बढ़ोतरी के खिलाफ एसएफआई और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने विक्ट्री टनल पर चक्का जाम कर दिया। इसमें आम छात्रों ने भी हिस्सा लिया। काफी देर तक छात्र फीस वृद्घि को लेकर विवि प्रशासन और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे पुलिस के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को उठा कर गाड़ियों में भर दिया। महज 15 मिनट में पुलिस ने बल प्रयोग कर, लात घूंसों से पीट पीट कर गाड़ियों में जबरन ठूंसा, इनमें छात्राएं भी शामिल थी।
इससे कई छात्र जख्मी भी हो गए हैं। सभी प्रदर्शनकारियों को मौके से गाड़ियों में भर कर न्यू शिमला की ओर भेज दिया गया। इसके बावजूद करीब आधे घंटे तक मौके पर पुलिस का कड़ा पहरा रहा।
52 छात्र गिरफ्तार
पुलिस की इस कार्रवाई में 47 छात्र और 5 छात्राओं कुल 52 छात्र छात्राओं को गिरफ्तार किया गया है। छात्र एकता मंच के पदाधिकारी आशीष सिक्टा और राहुल चौहान का आरोप है कि पुलिस जवानों ने उन्हें बूरी तरह से पीटा और घसीटा उनके साथ गाली गलौच की, गाड़ी में भरे जाने के बाद उनके साथ पुलिस जवानों ने उन्हें पीटा।
इसमें कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई और उनके कपड़े फाड़े गए। कई छात्रों के इस खींच तान में मोबाइल भी गुम हो गये। पुलिस जवानों ने छात्रों के मोबाइल भी छीने है। इसके साथ ही छात्रों पर लाठियां भी भांजी गई है।
छात्रों को गाड़ियों में भरे जाने के बाद वहां मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं और पुलिस जवानों के बीच कहासुनी और बहस भी हुई। इससे पूर्व छात्रों ने ताराहाल की ओर जाने वाली सड़क पर भी रास्ता रोकने का प्रयास किया, जहां से पुलिस ने छात्रों को उठा लिया।
प्रदर्शनकारियों को सिर्फ उठाया गया- एएसपी
एएसपी भजन नेगी ने छात्र एकता मंच द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों को निराधार करार देते हुए कहा कि सिर्फ रास्ता रोकने और चक्का जाम करने वाले छात्रों को पुलिस जवानों ने उठा कर गाड़ियों में भरा है। उनका कहना है कि छात्रों को आगाह भी किया गया था।
बसों की छात्रों की पीटाई- छात्र एकता मंच
छात्र एकता मंच द्वारा लगाए गए आरोप के मुताबिक बसों में इन कार्यकर्ताओं को बूरी तरह से पीटा गया है। इनमें राहुल चौहान, अंकित दूबे, दिनेश, कपिल, रोहित, आशीष, प्रवीण, आशिष सिक्टा, कुशल कौंडल, अतुल शर्मा, गौरव अत्री, सरदारी सिंह आदि शमिल है।
मंच के पदाधिकारी आशीष सिक्टा और राहुल चौहान आरोप लगाया कि जिन छात्रों को अधिक चोटें आई उनको थाने के बाहर से ही छोड़ दिया गया। ताकि मेडिकल न करवाना पड़े।