हिमाचल प्रदेश के छात्रावास सुविधा वाले सरकारी स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने बजट देना बंद कर दिया है। इन छात्रों को केंद्र से आने वाले बजट से ही मुफ्त छात्रावास और पढ़ाई की सुविधा वर्ष 2011 से दी जा रही थी। अब केंद्र से बजट न आने के बाद इन छात्रों के अभिभावकों को 2500 रुपये मासिक खर्च देने के लिए कहा जाने लगा है। इससे अभिभावकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजधानी शिमला के पोर्टमोर कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में ऐसी सात छात्राएं छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। नाहन ब्वॉयज स्कूल, जोगेंद्र नगर और नगरोटा बगवां में करीब 47 दिव्यांग विद्यार्थियों को यह सुविधा मिल रही थी। बजट बंद होने से अभिभावकों को छात्रावास में रहने, खाने पीने का सारा खर्च वहन करना पड़ेगा। केंद्र सरकार से बजट बंद होने के बाद अब राज्य सरकार ही इन छात्रों को यह सुविधा जारी रखने पर कोई निर्णय लेकर राहत दे सकती है। इन दिव्यांग विद्यार्थियों में दृष्टिहीन और दृष्टिबाधित अन्य विकलांगता से ग्रसित शामिल हैं।
पहले की तरह जारी रखें सुविधा
पोर्टमोर स्कूल में पढ़ रही दिव्यांग छात्राओं के अभिभावक ज्ञान हेटा, अरविंद कुमार, केशव राम, मेहर सिंह और निक्का राम ने सरकार से पहले की तरह से निशुल्क आवासीय सुविधा जारी रखने की मांग उठाई है।
राज्य सरकार के समक्ष रखा है मामला
दिव्यांग छात्र छात्राओं को निशुल्क छात्रावास सुविधा के लिए इंटीग्रेटिड एजूकेशन फार डिसएब्लड चाइल्ड (आईईडीएस) मद के तहत केंद्र से ही बजट आता था। इसे अप्रैल माह से रोक दिया है। मामला केंद्र से उठाए जाने के बावजूद इसे जारी नहीं किया है। अब राज्य सरकार से बजट मुहैया करवाने का मामला उठाया है।
-वीरेंद्र शर्मा, निदेशक प्रारंभिक, स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर (समग्र शिक्षा अभियान)
नहीं मिला है इसके लिए बजट : सूद
कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पोर्टमोर के प्रधानाचार्य नरेंद्र सूद ने कहा कि स्कूल में सात दिव्यांग छात्राओं को निशुल्क छात्रावास सुविधा दी जा रही थी। अप्रैल से इन छात्राओं के लिए बजट नहीं आया है। इसे केंद्र से ही रोक दिए जाने की बात कही है। 2500 रुपये प्रति छात्रा खर्च को स्कूल को अपने स्तर पर वहन करना मुश्किल हो रहा है।
राज्य सरकार करे बजट का प्रावधान : श्रीवास्तव
विकलांगता सलाहकार बोर्ड के विशेषज्ञ सदस्य प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि दिव्यांग छात्र-छात्राओं को सुविधा मुहैया करवाना और इसे जारी रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र से बजट नहीं आया तो सरकार इनके मुफ्त आवासीय सुविधा के लिए बजट प्रावधान करे। वर्ष 2011 में उमंग फाउंडेशन की जनहित याचिका पर ही यह निशुल्क सुविधा शुरू की थी। अब भी इसके लिए संस्था मांग उठाएगी।