हिमाचल प्रदेश में हिमालयन परिपथ के विकास को स्वीकृति दी गई है।
पर्यटन संबंधी संसदीय समिति ने प्राकृतिक विरासत के खतरों के मद्देनजर इनके संरक्षण के लिए एक ठोस रूपरेखा तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समिति ने कहा है कि देश के पास प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है। सर्वाधिक वन संपदा है। इसके बावजूद इसे प्रतिस्पर्धात्मक आर्थिक फायदे के लिए इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका है।
समिति ने पाया कि मंत्रालय पर्यटन की विभिन्न योजनाओं के लिए पहले से तय फंड के उपयोग संबंधी उचित योजनाएं बनाने में नाकाम रहा। इसके चलते घरेलू और विदेशी पर्यटन से संबंधित योजनाओं को समय पर शुरू नहीं किया जा सका। वित्त मंत्रालय की ओर से फंड नहीं मिलने के कारण कई योजनाएं लंबित पड़ी हैं।
इस पर सरकार की ओर से तत्काल निर्णय लेने की जरूरत है। ऐसा नहीं होने पर राज्यों में अब तक कई योजनाओं पर हुआ खर्च व्यर्थ हो जाएगा और संबंधित राज्यों का पर्यटन विकास प्रभावित होगा। समिति ने पर्यटन विकास निगम के फायदे में होने पर संतोष व्यक्त किया है। समिति ने पर्यटन मंत्रालय द्वारा सभी विश्व विरासत स्थलों पर साउंड एंड लाइट शो शुरू करने के प्रयासों की भी सराहना की है। वाराणसी और सारनाथ के कई स्मारकों में समुचित प्रकाश व्यवस्था और वाराणसी के गंगा घाटों को आकर्षक बनाने के प्रयासों की भी समिति ने सराहना की है।
समिति ने यह भी पाया कि राज्यों की परियोजनाओं के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत राशि ही जारी की जा सकी। समिति ने तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार एवं आध्यात्मिक संवर्धन अभियान मिशन (प्रसाद) के तहत सभी राज्यों से प्रस्ताव मंगाने की सलाह दी है। मंत्रालय ने समिति को बताया कि राज्यों से पर्यटन विकास के लिए 42 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है।
इसके तहत जम्मू कश्मीर मे पर्यटन के आधारभूत ढांचे का एकीकृत विकास शामिल है। हिमाचल प्रदेश में हिमालयन परिपथ के विकास को स्वीकृति दी गई है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत से संबंधित स्थानों पर पर्यटन के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए केंद्रीय योजना बनाई गई है।
उत्तराखंड में स्वदेश दर्शन योजना के तहत धर्मस्थलों के रूट पर आधारभूत ढांचे के विकास की योजना को मंजूरी दी गई है। उत्तर प्रदेश में महत्वाकांक्षी योजना के तहत कुशीनगर और कपिलवस्तु का विकास होगा। कुशीनगर में साउंड एंड लाइट शो को भी मंजूरी दी गई है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश में आध्यात्मिक परिपथ के तहत शिमला-चौपाल-चुरधार-मंडी-कुल्लू-सोलन क्षेत्र का एकीकृत विकास विशेष योजना को स्वीकृति दी गई है।