हिमाचल के लोगों को फिलहाल बंदरों के उत्पात से राहत नहीं मिलेगी। केंद्र ने मदद करने से इंकार कर दिया है।
प्रदेश के लोगों को निकट भविष्य में बंदरों के उत्पात से राहत मिलने वाली नहीं है। इसका कारण यह है कि बंदरों के लिए वास स्थल विकसित करने के नाम पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने दो सौ करोड़ रुपये देने से मना कर दिया है।
मंत्रालय ने कहा है कि प्रदेश सरकार अपने स्तर पर इतनी राशि की व्यवस्था करे। प्रदेश सरकार पहले ही इतनी मोटी रकम देने से मना कर चुकी है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान वन विभाग ने बंदरों के वास स्थल को विकसित करने का प्लान कोर्ट में पेश किया था।
इस प्लान को कोर्ट ने ओके कर दिया था। इस प्लान के तहत बंदरों का वास स्थल विकसित किया जाना था। इस पर लगभग 200 करोड़ खर्च होने है। इस रकम से जंगलों में फलदार पौधे लगाए जाने थे, जिससे बंदर आबादी वाले क्षेत्र में न आने पाएं।
केंद्र ने ठुकरा दी सरकार की मांग
इतनी रकम देने को सरकार पहले ही मना कर चुकी है। इसके बाद सरकार की ओर से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से एप्रोच किया गया।
अनुरोध किया गया कि कैंपा मद से उसे दो सौ करोड़ की राशि अतिरिक्त दी जाए, लेकिन केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने अतिरिक्त धन देने से मना किया है। इसकी व्यवस्था प्रदेश स्तर पर ही करने के लिए कहा है।