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अब बेफिक्र करें पढ़ाई, सरकार देगी किताबें

Fri, 11 Dec 2015 02:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई में अब किताबों की कमी बाधा नहीं बनेगी। केंद्र सरकार के ‘पढ़ेगा भारत बढ़ेगा भारत’ अभियान के तहत प्रदेश के सभी स्कूलों में बुक बैंक बनाने का फैसला लिया गया है। बुक बैंक में पहली से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम की किताबों के अलावा मैग्जीन, कॉमिक्स, कार्टून बुक्स, नर्सरी राइमस, स्टोरी बुक्स का संग्रह किया जाएगा।
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पुरानी किताबों को यहां सहेज कर रखा जाएगा। वार्षिक परीक्षाएं खत्म होते ही बच्चों से उस कक्षा की किताबों को ले लिया जाएगा। अच्छी हालत की किताबों को दुरुस्त करवाकर नये शैक्षणिक सत्र में अन्य बच्चों को दिया जाएगा। नये सत्र में किताबों की सप्लाई देरी से होने के चलते पढ़ाई प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखते हुए यह योजना बनाई गई है।

सरकार पहली से आठवीं कक्षा तक निशुल्क किताबों का वितरण करती है। राज्य परियोजना निदेशालय सर्व शिक्षा अभियान ने सभी जिला परियोजना अधिकारियों को बुक बैंक की स्कूलों में व्यवस्था करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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बुक बैंक में रखेंगे मैग्जीन, कॉमिक्स
स्कूलों में तैयार किए जाने वाले बुक बैंक में पाठ्यक्रम की किताबों के अलावा मैग्जीन, कॉमिक्स, कार्टून बुक्स, नर्सरी राइमस, स्टोरी बुक्स भी रखी जाएंगी। इस बैंक के माध्यम से बच्चों में पढ़ने की रुचि को विकसित किया जाएगा।

एसएमसी, अभिभावकों की लेंगे मदद
बुक बैंक की व्यवस्था करने के लिए स्कूल मैनेजमेंट कमेटी, अभिभावकों और समाज के अन्य वर्गों की मदद भी ली जाएगी। नया शैक्षणिक सत्र समय से शुरू करने और बच्चों में पढ़ने-लिखने की प्रवृत्ति को बढ़ाने के लिए बुक बैंक बनाने का फैसला लिया गया है। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के पहले ही दिन बच्चों को अब किताबें उपलब्ध करवा दी जाएंगी।

निजी स्कूलों से स्पर्धा की तैयारी
निजी स्कूलों से स्पर्धा करने के चलते सर्व शिक्षा अभियान के तहत यह योजना चलाई जा रही है। निजी स्कूलों में सत्र समाप्त होते ही, बच्चों को अगली कक्षा की किताबें उपलब्ध करवा दी जाती है। इससे छुट्टियों के दौरान भी बच्चे अगली कक्षा की तैयारी शुरू कर देते हैं लेकिन सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू होने के बाद किताबों का वितरण होता है। निशुल्क किताबों की सरकारी सप्लाई कई बार लेट हो जाती है। इससे नया शैक्षणिक सत्र समय से शुरू नहीं हो पाता। परीक्षाओं के बाद हुई छुट्टियों में भी बच्चे किताबों के अभाव में पढ़ते नहीं है।
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