भारत सरकार ने चार देशों से सेब, नाशपाती और इसी प्रजाति के पौधों के आयात पर नई बंदिशें लगा दी हैं। ये बंदिशें बुल्गारिया, स्पेन, नीदरलैंड और यूके से पौधों के आयात पर लगाई गई हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय को इन देशों के पौधों के माध्यम से लगभग तीन दर्जन नई बीमारियों और कीटों के भारत आने की आशंका है।
जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विदेशों से आधुनिक किस्मों के पौधों का आयात किया जा रहा है। अब संबंधित देशों से आयात किए जा रहे पौधों के अधिसूचित रोगों से मुक्त होने पर ही उन्हें भारत लाया जा सकेगा। रोगों से मुक्त पौधों का प्रमाणपत्र साथ लाना जरूरी होगा।
नई अधिसूचना के मुताबिक बुल्गारिया से एप्पल राइट माइट, ग्रीष्म फ ल टोरटिक्स, साफलाइज, ग्रेट ब्राउन ट्विस्ट मोथ, रेस्पबेरी बीटल, मेडिटेरानियन फ्रूट फ्लाई, कामन स्नैल, यूरोपियन पीयर स्केल, फायरब्लाइट, जैसे कुल 24 रोग और कीट भारत आ सकते हैं। स्पेन से समर फ्रूट टोरटिक्स, सावफलयाज, रेसावेरी बीटल, मेडिटेरिनियन फ्रूट फ्लाई, कॉमन स्नेल, कॉडलिंग मॉथ आदि 23 रोग और कीट भारत आ सकते हैं।
यूके से एप्पल रस्ट माइट, समर फ्रूट टोरट्रिक्स, एमेटास्टेजिया ग्लाबरेटा, ग्रेट ब्राउंन ट्विस्ट मोथ, ब्लास्टो बेसिस डेकोलोरेला, कोडलिंग मोथ, मुस्कुलाना आदि 11 कीट और रोग हमारे देश में प्रवेश कर सकते हैं। नीदरलैंड से एप्पल रस्ट माइट, समर फ्रूट टोरट्रिक्स, ग्रेट ब्राउन ट्विस्ट मोथ, बोट्रीटिस सिनेरिया, कोडलिंग मोथ, हर्लिक्यून लेडीबर्ड, वुड मोथ, ब्राउन मोथ, कॉमन क्वैकर, पेनसिलियम एक्सपेंसम, नाशपाती का काला धब्बा 17 रोग या कीट भारत आ सकते हैं। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव उत्पल कुमार सिंह ने इन रोगों और कीटों से मुक्त पौधों का ही आयात करने की अधिसूचना जारी की है।
आयात पर रोक जरूरी
‘ऐसी बंदिशें जरूरी हैं। तभी हमारे देश में सेब, नाशपाती और इस प्रजाति के फलों से संबंधित फसलें अधिसूचित विदेशी रोगों और कीटों से बच पाएगी। देश में विदेशों से अनुसंधान और उत्पादन दोनों ही उद्देश्य से पौधों का आयात किया जाता है, मगर ये हिमाचल जैसे राज्य में बीमारियां लाकर यहां सेब के बगीचों को तबाह भी कर सकते हैं। - डा. विजय सिंह ठाकुर, कुलपति डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विवि।