हिमाचल के किन्नौर जिला के नेसंग गांव की 32 वर्षीय अनुपमा की स्वाइन फ्लू से आईजीएसी शिमला में मौत होने का मामला गरमा गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि रिकांगपिओ के चिकित्सक की कोताही के कारण अनुपमा की मौत हुई है।
परिजनों का कहना है कि अगर अनुपमा को स्वाइन फ्लू था तो उसे समय पर उपचार के लिए आईजीएमसी क्यों रेफर नहीं किया गया ? परिजनों ने सरकार और स्थानीय प्रशासन से उक्त डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
साथ ही कहा कि अगर उनकी सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। रिकांगपिओ में अनुपमा के पति भूपेंद्र नेगी और माता इंदु देवी ने यहां जारी एक बयान में आरोप लगाया कि रिकांगपिओ अस्पताल के एमडी ने अनुपमा को रेफर तब किया जब उसकी हालत ज्यादा गंभीर हो गई थी।
मरीज को एक सप्ताह तक रिकांगपिओ अस्पताल में निमोनिया की दवाई दी जाती रही। जब मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी तो मरीज को आईजीएमसी रेफर कर दिया। मरीज अनुपमा को जब आईजीएमसी शिमला पहुंचाया तो वहां शाम के वक्त उसकी मौत हो गई।
अचानक बिगड़ गई थी तबीयत : एमडी
एमडी यू. शर्मा ने कहा कि मरीज और परिजनों को अधिकार है कि वो कहीं भी इलाज करवा सकते हैं। आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि परिजनों की ओर से उन्हें मरीज को रेफर करने के लिए नहीं कहा था। मरीज की तबीयत सुधर रही थी तभी उसे रेफर नहीं किया था।
अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण मरीज को रेफर करना पड़ा। किन्नौर की महिला को हुए स्वाइन फ्लू के बाद रिकांगपिओ चिकित्सालय में भी ऐहतियात के तौर पर अन्य मरीजों को इलाज मुहैया करवाया जा रहा है। आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है और दवाइयां उपलब्ध करवाई गई हैं। अस्पताल में चार मरीजों को एडमिट किया गया है। उन्हें ऐहतियात के तौर पर लक्षण देखते हुए स्वाइन फ्लू की दवाइयां दी जा रही हैं।