सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे हिमाचल के लाखों बागवानों को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने जोरदार झटका दिया है। मंत्रालय ने विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने से साफ इंकार कर दिया है। कहा है कि भारत सरकार की गैट एवं डब्ल्यूटीओ से वचनबद्धता है। वर्तमान में विदेशी सेब पर 50 फीसदी आयात शुल्क है।
इसके बावजूद भारत के लिए विदेशों से हर साल बड़ी मात्रा में सेब सप्लाई किया जा रहा है। विदेशी सेब के देश भर की मंडियों में आयात से हिमाचल के बागवानों को उनकी फसल का कम दाम मिल रहा है, इसीलिए हिमाचल सरकार आयात शुल्क बढ़ाने की लगातार मांग उठा रही है।
सरकार ने दिया ये तर्क
भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के अनुभाग अधिकारी बीके झा ने बतौर सहायक केंद्रीय जनसूचना अधिकारी जानकारी दी है कि वर्तमान में भारत सरकार विदेशी सेब पर 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगा रही है। वर्तमान में लगाया गया यह आयात शुल्क गैट और डब्ल्यूटीओ से भारत की कमिटमेंट के हिसाब से अधिकतम है।
ऐसे में आयात शुल्क बढ़ाने का कोई स्कोप नहीं है। बीके झा ने माना कि हिमाचल सरकार ने अनेक बार विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त हिमाचल के बागवानों के हितों को देखते हुए एक नीति बनाने का भी अनुरोध किया है। आरटीआई में यह सूचना फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ हिमाचल प्रदेशाध्यक्ष हरीश चौहान को मिली है।
बढ़ाने के बजाय घटाया जा सकता है आयात शुल्क
विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने के बजाय घटाया जा सकता है। डब्ल्यूटीओ की दोहा राउंड की वार्ता में भारत सरकार ने सेब को विशेष उत्पाद के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया है। अगर सेब को विशेष उत्पादों की श्रेणी में नहीं रखा गया तो इस पर आयात शुल्क 50 फीसदी से भी घटकर शून्य हो सकता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में अभी वक्त लगेगा।
तीन साल से इन देशों से भारत आया खूब सेब
आरटीआई में मिली सूचना के मुताबिक अमेरिका, चिली, न्यूजीलैंड, चीन, इटली, बेल्जियम, ईरान, दक्षिणी अफ्रीका, अफगानिस्तान, फ्रांस, ब्राजील, पोलैंड, यूएई, तुर्की, थाईलैंड, पाकिस्तान, यूके, कनाडा, आस्ट्रेलिया आदि।
बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स का कहना है कि हिमाचल की कांग्रेस सरकार बागवानों के हितों का विशेष ध्यान रखे हुए है। आयात शुल्क पर केंद्र सरकार के रुख पर सरकार की ओर से उचित कदम उठाया जाएगा।