हिमाचल के पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में अब कड़ाके की ठंड में घर के अंदर ठिठुरना नहीं पड़ेगा। लोग बिना बुखारी, अंगीठी, हीटर जलाए आराम से रह सकेंगे। राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने सर्दियों में घरों का गर्म रखने वाली सोलर पैसिव हाउसिंग तकनीक तैयार की है। इस तकनीक से सोलर एनर्जी के जरिये घर को गर्म रखा जा सकता है।
राज्य विज्ञान एवं तकनीकी विभाग ने वास्तुकारों, अभियंताओं और वैज्ञानिकों के सहयोग से इसे तैयार किया है। इसका फायदा लेने के लिए घर को सौर ऊर्जा तकनीक के तहत डिजाइन करना होगा। दो हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों और पहाड़ों पर यह तकनीक कारगर साबित होगी। विशेषज्ञों का दावा है कि सौर ऊर्जा भवन से ईंधन तो बचेगा ही, बिजली खर्च भी कम हो जाएगा।
पर्यावरण को भी नहीं होगा कोई नुकसान
कड़ाके की ठंड में भी आवास आरामदायक, स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक रहेंगे। पर्यावरण को भी इससे कोई नुकसान नहीं है। सौर ऊर्जा भवनों का निर्माण सूर्य के धरती के चारों ओर घूमने के मार्ग और हर दिशा में विभिन्न ऋतुओं में उस स्थान पर सौर ऊर्जा की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। इस तकनीक से सरकारी और अर्द्ध सरकारी विभागों के भवनों का निर्माण भी किया जाएगा।
आधा दर्जन राज्यों के लोगों ने लिया प्रशिक्षण
इस तकनीक से भवनों का निर्माण हिमाचल में ही नहीं बल्कि अन्य पहाड़ी राज्यों में भी होगा। योजना का लाभ लेने के लिए आधा दर्जन से अधिक राज्यों के लोग हिमाचल में विज्ञान एवं तकनीकी विभाग से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
सूबे में इन जिलों के लोगों को फायदा
हिमाचल के शिमला, मंडी, लाहौल स्पीति, कुल्लू-मनाली, सोलन, किन्नौर, चंबा और कांगड़ा जिले के ठंडे इलाकों के लोग इस तकनीक से मकान बनाकर ठंड से राहत पा सकते हैं।
इन दस बातों का रखा जाएगा ध्यान
राज्य विज्ञान एवं तकनीकी विभाग सुंदरनगर के प्रभारी कलित भारद्वाज ने बताया कि इस तकनीक से बनने वाले सौर ऊर्जा भवन दस विशेष बातों पर आधारित होंगे। इनमें स्थल, दिशाएं, प्लानिंग, प्राकृतिक प्रकाश, भवन निर्माण सामग्री एवं अवरोधन, सौर ऊर्जा ट्रांब दीवार, सौर कक्ष हवा को गर्म करने का संयंत्र, सौर ऊष्मा, वायु सेवाहक और सौर ऊर्जा छत संचयक शामिल है।