फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिलासपुर एम्स की 40 हेक्टेयर वन भूमि को केंद्र की मंजूरी

Sun, 03 Feb 2019 12:10 PM IST
अरविन्द ठाकुर विवेक मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के कोठीपुरा में भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की आधारशिला रखने के लिए जमीन की उपलब्धता का रास्ता साफ हो गया है। 1331.19 बीघा भूमि पर एम्स बनने जा रहा है। इसमें 538.06 बीघा यानी करीब 40. 60 हेक्टेयर वन भूमि शामिल है।

विज्ञापन


इस वन भूमि के डायवर्जन को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की वन मंजूरी समिति (एफएसी) ने सामान्य शर्तों के साथ हरी झंडी दे दी है। एम्स का समूचा परिसर 80 फुटबॉल के मैदान से भी बड़ा होगा। इस परियोजना के लिए करीब 8430 पेड़ भी काटे जाने हैं।

अभी 1351 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को पर्यावरण मंजूरी हासिल करने के लिए विस्तृत पर्यावरण अध्ययन कराना होगा। इसके साथ ही संबंधित क्षेत्र में जनसुनवाई भी करनी होगी।
विज्ञापन


इसी महीने राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन समिति (एसईआइएए) के सदस्य सचिव ने परियोजना के अतिरिक्त टर्म्स ऑफ रिफरेंस (टीओआर) को मंजूरी देते हुए व्यापक पर्यावरणीय अध्ययन कराने को कहा है। इस टीओआर की वैधता तीन वर्षों तक रहेगी।

इससे पहले केंद्रीय मंत्रालय की वन मंजूरी समिति ने एम्स के लिए इतनी बड़ी जमीन मांगने पर एतराज जताया था। साथ ही दिसंबर में हिमाचल सरकार से पूछा था कि आखिर इतनी बड़ी जमीन क्यों चाहिए? वहीं, वन भूमि में ही डंपिंग साइट क्यों बनाई जाए।

Trending Videos
विज्ञापन

राज्य ने कहा- दुर्गम पहाड़ पर नहीं बन सकता अस्पताल

11 जनवरी को हिमाचल की ओर से वन मंजूरी समिति को दस्तावेज देकर यह सफाई दी गई थी कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत एम्स का निर्माण किया जाना है। पहाड़ी क्षेत्र पर एम्स और डंपिंग साइट बनाना बेहद कठिन होगा। अस्पताल के लिए सबसे उपयुक्त जमीन चिह्नित की गई है।

बिना इस्तेमाल वाली जमीन को बनाना होगा हरित क्षेत्र
एफएसी ने 15 जनवरी को बैठक के बाद यह मंजूरी दी है। साथ ही कहा कि ऐसी जमीन जिसका इस्तेमाल न हो उसे हरित क्षेत्र बनाया जाए। डंपिंग साइट को ग्रीन कवर से ढका जाए। इसके लिए लागत परियोजना निर्माण करने वाली संबंधित एजेंसी से ही ली जाए।

कैंसर अस्पताल के लिए परियोजना प्रस्तावक को गठित समिति के पास भेजा
पर्यावरण मामलों के अधिवक्ता राहुल चौधरी ने अमर उजाला से बताया कि हिमाचल में पहले ही जमीन की बहुत किल्लत है। ऐसे में परियोजनाओं को बहुत ही सख्त निगरानी और मंजूरियों के साथ आगे बढ़ने देना चाहिए।

पर्यावरणीय समस्याओं को देखते हुए हाल ही में शिमला में कैंसर अस्पताल निर्माण के लिए एनजीटी ने परियोजना प्रस्तावक को गठित समिति के पास लौटा दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें