11 जनवरी को हिमाचल की ओर से वन मंजूरी समिति को दस्तावेज देकर यह सफाई दी गई थी कि प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत एम्स का निर्माण किया जाना है। पहाड़ी क्षेत्र पर एम्स और डंपिंग साइट बनाना बेहद कठिन होगा। अस्पताल के लिए सबसे उपयुक्त जमीन चिह्नित की गई है।
बिना इस्तेमाल वाली जमीन को बनाना होगा हरित क्षेत्र
एफएसी ने 15 जनवरी को बैठक के बाद यह मंजूरी दी है। साथ ही कहा कि ऐसी जमीन जिसका इस्तेमाल न हो उसे हरित क्षेत्र बनाया जाए। डंपिंग साइट को ग्रीन कवर से ढका जाए। इसके लिए लागत परियोजना निर्माण करने वाली संबंधित एजेंसी से ही ली जाए।
कैंसर अस्पताल के लिए परियोजना प्रस्तावक को गठित समिति के पास भेजा
पर्यावरण मामलों के अधिवक्ता राहुल चौधरी ने अमर उजाला से बताया कि हिमाचल में पहले ही जमीन की बहुत किल्लत है। ऐसे में परियोजनाओं को बहुत ही सख्त निगरानी और मंजूरियों के साथ आगे बढ़ने देना चाहिए।
पर्यावरणीय समस्याओं को देखते हुए हाल ही में शिमला में कैंसर अस्पताल निर्माण के लिए एनजीटी ने परियोजना प्रस्तावक को गठित समिति के पास लौटा दिया है।