वर्ष 1971 में बना पुल टूटने से जनजातीय क्षेत्र भरमौर की 29 पंचायतें अलग-थलग पड़ गईं हैं। विभागीय टीम ने क्षतिग्रस्त पुल के मलबे को हटाकर वैकल्पिक मार्ग बनाना शुरू कर दिया है।
चंबा-भरमौर नेशनल हाईवे पर भरमौर उपमंडल को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला सीमेंट से बना 30 मीटर लंबा लूणा पुल पहाड़ी से चट्टानें गिरने के कारण ध्वस्त हो गया। शनिवार देर रात हुए भूस्खलन से पहाड़ी से चट्टानें पुल पर आ गिरीं। वर्ष 1971 में बना पुल टूटने से जनजातीय क्षेत्र भरमौर की 29 पंचायतें अलग-थलग पड़ गईं हैं।
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गनीमत रही कि जब चट्टानें गिरीं तो उस समय सड़क पर कोई राहगीर या वाहन नहीं था। इसके चलते कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। जिस स्थान पर यह पुल टूटा है, वहां से भरमौर उपमंडल की जनजातीय सीमा शुरू होती है। पुल दोबारा बनने में कई दिन लग सकते हैं।
ऐसे में भरमौर और होली के लोगों को चंबा आने के लिए पैदल सफर करना पड़ेगा। विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर क्षतिग्रस्त पुल के मलबे को हटाकर वैकल्पिक मार्ग बनाना शुरू कर दिया है। क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर बैली ब्रिज बनाने की भी विभागीय अधिकारी बात कह रहे हैं।
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बीते दो दिन पहले होली के चोली नाले पर कंपनी की लापरवाही से भारी-भरकम वाहन गुजारने से पुल टूट गया था। अब शनिवार को लूणा के पास चट्टानें गिरने से भरमौर उपमंडल को जोड़ने वाला पुल ध्वस्त हो गया।
पुल टूटने से भरमौर और होली में पन विद्युत परियोजनाओं का कार्य कर रही कंपनियों समेत हर वर्ग के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी नरेंद्र कुमार चौहान ने मौके पर पहुंचकर लोगों के लिए जल्द वैकल्पिक मार्ग बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग को आदेश दिए।