फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shimla News: सीबीएसई बने स्कूलों में न किताबें न गुरु, पढ़ाई कैसे करें शुरू

विज्ञापन
विज्ञापन
जिले में 24 स्कूलों को सीबीएसई बनाने के बाद अन्य बंदोबस्त करना भूली सरकार और विभाग, अभिभावक उठा रहे सवाल
विज्ञापन


जिले शैक्षणिक सत्र 12 फरवरी से हो चुका है शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में सीबीएसई बने सरकारी स्कूल अभी तक सिर्फ नाम के सीबीएसई बनकर रह गए हैं। शिक्षा विभाग अभी तक स्कूलों में न तो सीबीएसई के पाठ्यक्रम के अनुसार किताबें मुहैया करवा पाया है न ही शिक्षकों की नियुक्ति कर सका है। इस कारण लोगों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जिले में 24 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई में सरकार ने बदला है।

लोगों का कहना है कि सरकार ने स्कूलों को सीबीएसई तो बना दिया है लेकिन इन स्कूलों में पाठ्यक्रम उपलब्ध करवाना और शिक्षकों की नियुक्ति करना भूल गए हैं। जिले में ज्यादातर स्कूल शीतकालीन शैक्षणिक सत्र में चलने वाले हैं। इन स्कूलों में पहली से लेकर आठवीं कक्षा तक का शैक्षणिक सत्र 12 फरवरी से शुरू हुआ है। नए सत्र को शुरू हुए 4 महीने का समय बीतने को है लेकिन अभी तक न तो स्कूलों में किताबें पहुंची हैं और न ही शिक्षक तैनात किए हैं। इसके अलावा बड़ी कक्षाओं को शुरू हुए दो महीने हो चुके हैं।
विज्ञापन

लोगों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यार्थियों का लगभग आधा सत्र बिना सिलेबस, किताबों और शिक्षकों के बीतने जा रहा है। शीतकालीन स्कूलों में दिसबंर में वार्षिक परीक्षाएं होती हैं। ऐसे में मई और जून तक यदि छात्रों के पास किताबें ही नहीं होंगी तो छोटी कक्षाओं के बच्चे पाठ्यक्रम कैसे पूरा कर पाएंगे। इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा। लोगों ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में सीबीएसई के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया चली हुई है लेकिन सरकार कम से कम सीबीएसई के तहत स्कूलों में पाठ्यक्रम और किताबें तो मुहैया करवाएं।
विज्ञापन



सीएंडवी शिक्षक संघ भी उठा चुका है मांग
सीएंडवी शिक्षक संघ भी सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार किताबें मुहैया करवाने की मांग कर चुका है। जिले में शिक्षा विभाग ने 24 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई बनाया है। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखने को मिला है। कई स्कूलों में सीबीएसई बनने के बाद दाखिलों में बढ़ोतरी हुई है लेकिन समय पर किताबें और शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से विभाग और सरकार के सुस्त रवैये पर सवाल उठने लगे हैं। इन स्कूलों में हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें