सीबीएसई की दसवीं की बोर्ड परीक्षा में दूसरे स्थान पर रहे डीएवी न्यू शिमला के छात्र विकास सिंह पंवर प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहते हैं। 98.4 फीसदी अंक लेकर बेटे के परीक्षा पास करने और राज्य में नाम कमाने पर स्कूल शिक्षक पिता चतर सिंह पंवर और गृहणी माता बिंता देवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि कहा कि यह उसकी अपनी मेहनत का नतीजा है।
चौपाल के जुबली गांव के निवासी विकास सिंह पंवर के अनुसार वह रोज औसतन तीन घंटे मन लगाकर पढ़ाई करते हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट का इस्तेमाल जरूर करते हैं, लेकिन इंटरनेट से पढ़ाई से संबंधित जानकारी प्राप्त करते हैं।
आगे पढ़ाई में गणित, अर्थशास्त्र, इतिहास और राजनीति शास्त्र जैसे विषय में पढाई जारी रखेगा। विकास का कहना है कि माता-पिता और शिक्षकों ने हमेशा उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।
कान्वेंट ऑफ जीजस एंड मेरी की छात्रा अंजली शर्मा ने 82.2 फीसदी अंक अर्जित कर राज्य में तीसरा स्थान पाया है। अंजली एक सफल डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों का उपचार कर उन्हें दर्द से राहत देना चाहती हैं।
अंजली के पिता देव राज शर्मा शिक्षा विभाग में और माता गृहणी हैं। मूलत: कोसाकोटी चेवड़ी रोहड़ू की रहने वाली अंजली पढ़ाई से संबंधित विषय को पहले शिक्षकों से पूछती हैं और फिर किताबें और अंत में इंटरनेट से उसे खोज कर पढ़ती हैं।
सोशल मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करती हैं। अंजली ने अब तक सिर्फ सेल्फ स्टडी से ही पढ़ाई की है। आगे एमबीबीएस के लिए जरूरत पढ़ने पर जरूर कोचिंग करेंगी।
केंद्रीय विद्यालय जाखू की छात्रा श्रुति ने दसवीं कक्षा की परीक्षा में 98.2 फीसदी अंक अर्जित कर प्रदेश में तीसरा स्थान पाया है। बैंक कर्मी कुलदीप धीमान और माता गृहणी सुशीला धीमान का कहना है कि बेटी की इस सफलता पर उन्हें नाज है। श्रुति धीमान ने कहा कि उनका सपना डॉक्टर बनकर मानवता की सेवा करना है।
श्रुति ने कभी ट्यूशन नहीं ली, बस पढ़ाई के रोजाना दो से ढाई घंटे देती हैं। समय मिलता है तो सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करती हैं। परीक्षा के दिनों में कुछ और अधिक समय पढ़ाई को देती हैं, इसके साथ ही खेलकूद और अन्य गतिविधियों में
भी बराबर रुचि लेती हैं।
सीबीएसई दसवीं कक्षा की परीक्षा में डीएवी स्कूल चंबा की छात्रा नंदिनी कुकरेजा ने जिला का नाम प्रदेश भर में चमका दिया है। नंदिनी ने 98.2 अंक हासिल प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया है।
नंदिनी की इस कामयाबी से जहां स्कूल प्रबंधन खुश है तो वहीं दूसरी तरफ अभिभावक भी गदगद हो उठे हैं। नंदिनी के पिता हितेंद्र कुकरेजा बिजनेसमैन और माता अनीता कुकरेजा शिक्षक हैं।
नंदिनी की इस उपलब्धि के बाद घर में बधाई देने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। अमर उजाला से बात करते हुए नंदिनी कुकरेजा ने बताया कि वह इंजीनियर बनना चाहती हैं। जिसके लिए वे पूरी मेहनत करेंगी।